चंडीगढ़। पीजीआई के आठ विशेषज्ञों को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी का फेलो चुना गया है। इनमें डॉ. राकेश कपूर, डॉ. विकास गौतम, डॉ. रीमा बंसल, डॉ. ऊषा दत्ता, डॉ. अरुण बरनवाल, डॉ. नवीन संख्यान, डॉ. साधना शर्मा और डॉ. आदित्य अग्रवाल शामिल हैं। इन्हें यह पुरस्कार इनके अकादमिक में उत्कृष्ट और पेशेवर उपलब्धि को देखते हुए दिया गया है। बता दें कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी एक ऐसी संस्था है, जो चिकित्सा और सामाजिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपने संसाधन के रूप में अकादमी की उत्कृष्टता को बढ़ावा देती है और उसका उपयोग करती है। उन्हें यह सम्मान एम्स जोधपुर में आयोजित 64वें नैम्सकॉन में दिया गया। डॉ. राकेश कपूर पीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग में प्रोफेसर और यूनिट प्रमुख हैं। वे टाटा मेमोरियल सेंटर मुल्लांपुर और संगरूर पंजाब (टीएमसी, मुंबई की इकाई) परमाणु ऊर्जा विभाग (भारत सरकार) के संस्थापक निदेशक थे। उन्हें भारत में विकिरण ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में छात्रवृत्ति, नेतृत्व, अनुकरणीय सेवा और महत्वपूर्ण योगदान के लिए आईसीआरओ फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कैंसर की ब्रेकीथेरेपी में इन विवो डोसिमेट्री तकनीक पर काफी काम किया है, जबकि डॉ. विकास गौतम मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के क्षेत्र में उनकी ओर से घाव देखभाल में एक विशेष शोध और उससे संबंधित पेटेंट प्राप्त किया है। इसके साथ उनके शोध के आधार पर मधुमेह के पैर के अल्सर में पैर काटने से बचाने और बेडसोर्स सहित पुराने गैर-उपचार अल्सर को भी ठीक करने में सफलता मिली है। डॉ. रीमा बंसल एडवांस्ड आई सेंटर में यूवाइटिस और विट्रो-रेटिना सेवाओं में प्रोफेसर हैं। उनके नाम 18 पुरस्कार हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय सम्मेलनों में लगभग 240 अतिथि व्याख्यान, सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में 170 वैज्ञानिक प्रकाशन और पुस्तकों में 27 अध्याय लिखे हैं। एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स सेंटर में बाल चिकित्सा न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. नवीन सांख्यान को बाल न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मस्तिष्क पर विटामिन बी12 की कमी के प्रभावों पर उनके शोध को मान्यता मिली और इसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ा है। उनके पास विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशन और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों की ओर से समर्थित शोध परियोजनाएं हैं। डॉ. ऊषा दत्ता पीजीआईएमईआर में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर और प्रमुख हैं, जिनका अस्पताल और स्वास्थ्य देखभाल में खास स्थान है। पीजीआई के आर्थोपेडिक विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. आदित्य अग्रवाल, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। डॉ. अरुण बरनवाल बाल रोग विभाग में संकाय सदस्य रह चुके हैं।