पापा, आप भगवान को पत्र क्यों नहीं लिखते। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान रामदीन को एकदम से लगता है जैसे कि बेटे ने उसको मूलमंत्र बता दिया है।
भूख से बिलखता बच्चा... परेशान घरवाले... इन सभी परिस्थितियों के बीच आखिरकार वह भगवान से दस हजार रुपये देने का अनुरोध करता है।
यह है पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में मंचित नाटक लेटर टू गाड। इस नाटक में मनोज राणा मुख्य अतिथि, गेस्ट आफ आनर एके सिंह और सतीश कत्याल स्पेशल गेस्ट रहे।
राजू वैद के लिखे इस नाटक को डायरेक्ट किया राजेश कुमार ने। नाटक में संगीत दिया एचएम सिंह ने। लेटर टू गाड में दिखाया गया है कि किसान रामदीन भूख से जूझ रहा है और बेटे की सलाह मानकर वह भगवान को दस हजार रुपये भेजने के लिए पत्र लिखता है। वह यह पत्र डालता है डाक विभाग में।
चिट्ठी पोस्ट आफिस में जाती है तो पोस्ट मास्टर चिट्ठी पढ़कर भावुक हो जाते है। वह स्टाफ के सदस्यों से बात करते हैं और सबकी मदद से किसी तरह आठ हजार रुपये जुटाते हैं।
पोस्ट मास्टर इतने ही रुपये रामदीन को भिजवाने के लिए कहता है। कुछ दिन बाद ही एक चिट्ठी और आती है। डाकघर के लोगों को लगता है कि किसान ने उनको धन्यवाद किया होगा, लेकिन जब चिट्ठी खोली जाती है तो सभी हैरान रह जाते हैं।
चिट्ठी में लिखा होता है हे भगवान आपने मेरी मदद की धन्यवाद... लेकिन आगे से कभी पैसे भेजें तो दूसरे डाकखाने से भेजें, क्योंकि आपके भेजे गए पैसों में से दो हजार रुपये डाकघर वालों ने खा लिए।
नाटक में यह थे पात्र
राजू वैद, करतार राणा, राकेश मांझी, रिषी, राजेश कौंडल, रिंकू जैन, हेमा शर्मा, जग्गा, मोनिका, मास्टर अक्षित कत्याल और प्रीत।
लेखन तो मेरा पैशन है
कुरुक्षेत्र के रहने वाले राजू वैद ने कहा कि उनका पैशन लेखन है। वह चाहते हैं कि समाज में होने वाली बुराइयों को मंच पर कटाक्ष के माध्यम से दिखाएं। राजू वैद ने कहा कि उनको लेखन का शौक बचपन से ही रहा और इसी का नतीजा है लेटर टू गाड, जिसको उन्होंने जीएल फाउंटेन से अडाप्ट किया।
जल्द देखेंगे फिल्मों में
मुंबई के रहने वाले करतार राणा ने कहा कि थिएटर से वह 1988 से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जुगनी में काम किया और हिंदी फिल्मों में भी काम कर रहे हैं। जल्द ही उनकी फिल्म प्वाइंट जीरो वन शुरू होगी। करतार राणा ने बताया कि वह जालंधर दूरदर्शन के सीरियल अफसाना ए कश्मीर में काम किया है।