शहर में पब्लिक टॉयलेट के रखरखाव का काम देख रही सेलवेल कंपनी का नया टेंडर नगर निगम ने रद्द कर दिया है। कंपनी के टेंडर में तमाम गड़बड़ियां होने और सीबीआई जांच के बावजूद निगम ने सिर्फ उनका टेंडर रद्द करके पल्ला झाड़ लिया।
निगम ने न तो अभी तक कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया है और न ही उनपर मेहरबानी करने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई की है।
सोमवार को निगम सदन की बैठक में भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने एक बार फिर टॉयलेट ब्लॉक का मुद्दा उठाया। उन्होंने अफसरों से जवाब मांगा कि अभी तक कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इस पर एक्सईएन गुरप्रीत सिंह ने जवाब दिया कि कंपनी का नया टेंडर कैंसिल कर दिया गया है। एक्सईएन ने कहा कि कंपनी का टेंडर 31 मार्च को खत्म हो गया था और अब उन्हें टॉयलेट ब्लॉक रिपेयर करवाकर हैंडओवर करने को कहा गया है।
निगम सदन में पास हुआ था एजेंडा
नगर निगम ने कंपनी का नया टेंडर तो रद्द कर दिया, लेकिन दिलचस्प बात है कि इसी कंपनी को दोबारा टेंडर देने का एजेंडा सदन में पास हो गया था। हैरानी की बात है कि अधिकतर पार्षदों ने कंपनी की तरफदारी की थी।
19 फरवरी को हुई सदन की बैठक में वोटिंग हुई थी, जिनमें 13 पार्षदों ने कंपनी के हक में वोट दिया था। अब सीबीआई जांच शुरू होने के बाद सभी पार्षद चुप बैठ गए हैं, जबकि कई तो अब कंपनी के खिलाफ ही बोलने लगे हैं।
जून 2013 को हुआ था नया टेंडर
निगम ने 2007 में कंपनी को टॉयलेट ब्लॉक की देखरेख का टेंडर अलॉट किया था। उनका कांट्रेक्ट 2012 में खत्म हो गया और कंपनी को एक्सटेंशन मिल गई। जून 2013 में दोबारा टेंडर हुआ।
इस बार भी सेलवेल ने ही सबसे कम रेट भरा। अब कंपनी को दोबारा टेंडर देने का प्रस्ताव एफएंडसीसी और निगम सदन दोनों ने पास कर दिया था। अब नए टेंडर के खिलाफ जब सीबीआई को शिकायत मिली तो निगम को ये टेंडर रद्द करना पड़ा।
नहीं हुई कोई रिकवरी
ओएसडी-2 की तरफ से कंपनी को 20 मार्च को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें कंपनी को 98 लाख और 36 लाख रुपये जमा करवाने को कहा गया। निगम ने कंपनी को 3 दिन का समय मांगा गया था।
अभी तक कंपनी ने यह राशि निगम के खाते में जमा नहीं करवाई। इसके बावजूद निगम अफसरों ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट नहीं किया।