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और दस मिनट में पास कर दिए दस एजेंडे

Tue, 31 Dec 2013 10:02 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़।
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नगर निगम की साल की आखिरी बैठक बिना किसी हंगामे के हुई। बैठक में महज 11 एजेंडे थे जिनमें से केवल एक पर ही विस्तार से चर्चा हुई। अन्य दस एजेंडा दस मिनट में ही पास हो गए।
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शहर के स्कूलों में छुट्टी के बाद स्थानीय इलाके के बच्चों को खेलने के लिए मैदान दिए जाने का एजेंडा भी पास हो गया। यह एजेंडा पहली बार निगम सदन में लाया गया था।

इस पर सभी पार्षदों से अब राय मांगी गई है। पार्षदों को कहा गया है कि वे अपने इलाके में यह सुविधा शुरू करने के लिए स्कूलों का चयन खुद करे। अभी फिलहाल सेक्टर-21 के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा।
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रख-रखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी निगम की
जिन स्कूलों में यह सुविधा शुरू की जाएगी, वहां मैदान के रख-रखाव से लेकर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी निगम की होगी। अगर खेलते वक्त स्कूल प्रॉपर्टी को नुकसान होता है तो उसकी भरपाई निगम करेगा। इतना ही नहीं अगर कोई बच्चा शाम को खेलते वक्त लेट हो गया तो निगम कर्मचारी उसे घर छोड़कर आएंगे।

बंसल ने कहा सभी बच्चों के लिए हो सुविधा
एजेंडे में एक शर्त रखी गई थी कि स्कूल चौकीदार आईकार्ड देखकर बच्चों को अंदर जाने की इजाजत दें। इस पर सांसद पवन कुमार बंसल ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो कुछ ही बच्चे खेल पाएंगे। हर बच्चे को यह सुविधा मिलनी चाहिए।

...चलो याद तो आई विकास की
बैठक में एक बात खास रही कि हर कोई पार्षद सिर्फ विकास को लेकर ही बात कर रहा था। बैठक की शुरूआत में पार्षदों के प्रश्नों की बजाय एजेंडों से हुई। बैठक में हंगामा न होने पर मेयर सुभाष चावला भी काफी खुश नजर आए और उन्होंने कहा कि चलो साल के आखिर में ही सही, लेकिन सभी को विकास की याद तो आई।

बैठक शुरू होते ही गलती मान ली मेयर ने
फौजियों को हाउस टैक्स से छूट देने के एजेंडे पर जो मिनट्स रिकॉर्ड हुए थे, उसमें गलती हो गई थी। इस गलती के लिए मेयर सुभाष चावला ने बैठक शुरू होते ही माफी मांग ली।

मेयर ने कहा कि यह बड़ी गलती है, जिसकेलिए वे खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने कहा कि सभी फौजियों और भूतपूर्व फौजियों को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी टैक्स से छूट दी जाएगी।

बैठक से दो दिन पहले जब इस एजेंडे के लिए मिनट्स तैयार हुए थे तो उसमें सभी फौजियों की बजाय सिर्फ कुछ गैलेंटरी अवार्ड विनर को ही यह सुविधा देने की बात कही गई थी।
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इस पर मनोनीत पार्षद मेयर(रिटायर्ड) डीएस संधू ने आपत्ति जताई थी और इसका कड़ा विरोध किया था।
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