देश में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। हाल ही में जल शक्ति अभियान के तहत चिह्नित किए गए गिरते भूजल स्तर वाले शहरों में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल है, जो चिंताजनक है। ऐसे में अब प्रशासन और नगर निगम भूजल स्तर बढ़ाने की कवायद में जुट गए हैं। योजना के मुताबिक, शहर में पांच मानकों के आधार पर भूजल स्तर बढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि हाल ही में भूजल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशभर के 254 जिलों की सूची जारी की है, जहां तेजी से भूजल स्तर गिर रहा है।
चंडीगढ़ भी उस सूची में हैं। इसके बाद एडवाइजर और डीसी से मिलकर सामूहिक प्रयास के जरिए इस समस्या से निपटने की योजना तैयार की गई है। इस योजना पर 01 जुलाई से 15 सितंबर तक काम किया जाएगा। इसके तहत वाटर हार्वेस्टिंग, री-यूज ऑफ वाटर, वाटर बॉडी को फिर से रीजेनरेट करना, मास अवेयरनेस, प्लांटेशन ड्राइव के जरिए सितंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। चंडीगढ़ में भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए गवर्नर और एडवाइजर ने भी हर संभव प्रयास करने को कहा है।
निजी और सरकारी भवनों में लगाया जा रहा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भूमि में जल के स्तर को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाया जाए। प्रशासन की जिन इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है उन्हें चिह्नित कर देख रहा है कि वह चालू हालत में हैं या नहीं। साथ ही उन सरकारी और निजी बिल्डिंगों को भी चिह्नित किया जा रहा है जहां इस सिस्टम को लगाया जा सकता है। नगर निगम बिल्डिंग में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। साथ ही स्कूलों में भी इस सिस्टम को लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।
पानी के री-यूज के लिए शुरू किए प्रोजेक्ट
वर्तमान में शहर के पांच एसटीपी से गंदे पानी को फिर से उपयोग योग्य बनाया जा रहा है, लेकिन इस पानी का उपयोग गार्डनिंग के लिए ही कर सकते हैं। अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के डायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (डीओडी) को कम करने की तैयारी है। वर्तमान में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से नाले में छोड़ा जाने वाला पानी काफी हानिकारक है।
एनजीटी के निर्देशानुसार, इस प्रोजेक्ट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी का डीओडी लेस देन पांच कर दिया जाएगा। हालांकि लेस देन 10 तक डीओडी हो सकता है। इसके अलावा नाइट्रेट व फास्फोरस की मात्रा भी काफी कम हो जाएगी। वहीं किशनगढ़ में एक नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जाएगी। जहां डीओडी लेस देन 2 तक रहेगा। इस प्लांट से निकलने वाले पानी को लेक में में भी उपयोग कर सकेंगे।
तालाबों को गोद लेकर फिर से जीवित करेंगे
नगर निगम और प्रशासन शहर व गांव के तालाबों को गोद ले रहे हैं और इन्हें फिर से जीवित करेंगे। नगर निगम ने खुड्डा अली शेर में दो एकड़ में बने तालाब को गोद लिया है। उसे फिर से जीवित करने की भी तैयारी शुरू हो गई है। वहीं, प्रशासन ने सेक्टर-42 की झील को गोद लिया है। इसे भी फिर से जीवित किया जाएगा। फिलहाल शहर से जुड़े गावों में पांच तालाब हैं। इसी तरह शहर व गांव के जल स्रोतों को फिर से जीवित करने की तैयारी है।
स्कूल व कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाया जाएगा पानी को बचाने का पाठ
भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए अब शिक्षा विभाग स्टूडेंट को भी जागरूक करेगा। जल है तो कल है नाम से शिक्षा विभाग ने एक जल आंदोलन चलाया है। अतिरिक्त क्लास के साथ ही कंपीटीशन कराए जाएंगे। अलग से सेशन होंगे। साथ ही रैलियों के माध्यम से जागरूकता लाई जाएगी। इसमें पानी बचाना, पानी को साफ रखना और भूजल को बढ़ाने के तरीके बताए जाएंगे। वहीं आरडब्ल्यूए और मार्केट एसोसिएशन को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
दो माह में लगाएंगे ऐसे प्लांट जो बढ़ाएं जल स्तर
हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट व पर्यावरण 15 सितंबर तक ऐसे पौधों को रोपेगा जो भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक होते हैं। साथ ही लोगों को पौधे भी भेंट करेंगे। उस पेड़ का महत्व बताते हुए उसकी देखभाल का संकल्प दिलाएंगे। ऐसे ही लोगों से अपील करके ज्यादा से ज्यादा पौधे रोपने को कहेंगे।
हमने संकल्प लिया है कि अगले वर्ष तक भूजल स्तर को बढ़ाना है। प्रशासन की मदद से इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम देने का प्रयास है। उम्मीद है अगली लिस्ट में चंडीगढ़ का नाम नहीं होगा।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर