चंडीगढ़ में आजकल एक ही चर्चा सबकी जुबान पर है कि नगर निगम का 25वां मेयर कौन होगा। भाजपा के चार, कांग्रेस का मात्र एक पार्षद रेस में हैं। राजनीतिक कयासबाजी जारी है। इस सबके बीच यह मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है कि चंडीगढ़ के सही विकास के लिए मेयर का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर पांच साल होना चाहिए। इस संबंध में केंद्र को चिट्ठी भी लिख दी गई है।
बहरहाल निगम अब चुनावी मोड में आ चुका है। मेयर देवेश मोदगिल का कार्यकाल 9 जनवरी को पूरा हो चुका है लेकिन चुनाव 18 जनवरी को होना है। ऐसे में तब तक देवेश ही मेयर बने रहेंगे। बता दें कि मोदगिल का कार्यकाल अब तक के मेयर में सबसे ज्यादा रहा जबकि गुरचरण दास काला का कार्यकाल सबसे कम रहा। वे एक्टिंग मेयर बनाए गए थे, उनका कार्यकाल 27 दिन का रहा।
दो-दो बार बने हैं मेयर
कमलेश, हरजिंदर कौर, अनुचतरथ और सुभाष चावला को दो-दो बार मेयर बनने का अवसर मिला। इस वर्ष का मेयर चुनाव आरक्षित वर्ग से है। ऐसे में भाजपा में चार पार्षद भरत कुमार, राजेश कुमार कालिया, फरमिला और सतीश कैंथ के बीच मुकाबला है। इन चारों में से कौन मेयर होगा यह पार्टी की बैठक में तय होगा। वैसे ये सभी मेयर पद के इच्छुक अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगे हैं। कांग्रेस की मेयर पद की दावेदार एकमात्र पार्षद शीला देवी हैं। उनकी उम्मीदवारी पक्की है, लेकिन कांग्रेस के पार्षदों की संख्या मात्र चार है। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी औपचारिकता ही रहेगी।
नगर निगम में यह है दलीय स्थिति
भाजपा के 20 पार्षद, अकाली दल से एक, निर्दलीय एक, कांग्रेस के चार पार्षद हैं। एक वोट सांसद का होता है। नगर निगम में कुल 26 पार्षद चुने हुए हैं। मनोनीत पार्षदों की संख्या नौ है, हालांकि मनोनीत पार्षद मताधिकार में शामिल नहीं हो सकेंगे।