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आइटीआर फाइल करते समय ये ध्यान रखेंगे तो फायदे में रहेंगे

Mon, 31 Aug 2015 09:21 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आपने अगर अब तक इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल नहीं की है तो सोमवार 31 अगस्त आखिरी दिन है। इसके बाद रिटर्न फाइल करने पर आपको 1 प्रतिशत की दर से कुल टैक्स पर अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ेगा। यह ब्याज प्रति महीने की दर से लागू होगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से आईटीआर फाइल करने का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन कर दिया गया है।
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आप इसे खुद भी भर सकते हैं और अगर कुछ दिक्कत हो तो किसी कंसल्टेंट एडवोकेट या ऑनलाइन टैक्स पे करवाने वाली कंपनियों की मदद ले सकते हैं। इनकम टैक्स कंसल्टेंट और एडवोकेट सतीश बालियान के अनुसार आरटीआर भरते समय कई बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए।

अगर आपने गलत रिटर्न फाइल की है या कोई जानकारी छिपाई है तो याद रखें आयकर विभाग आपकी रिटर्न रिजेक्ट भी कर सकता है। साथ ही जिस मद में आपको छूट मिले उसका फायदा उठाने से न चूकें। जैसे, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, नेशनल सेविंग स्कीम और फंड आदि।
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एडवोकेट बालियान का कहना है कि बिजनेसमैन, सरकारी कर्मचारी या प्राइवेट फर्म आईटीआर फाइल करते समय सालाना इनकम, देशी-विदेशी बैंक खातों की जानकारी, देश-विदेश में मौजूद संपत्ति, एफडी पर मिलने वाला ब्याज, कृषि से होने वाली आय, साल में किए विदेशी टूर आदि की जानकारी आयकर विभाग से छिपाने से बचें।

ऐसी किसी भी संपति, आय या खातों की जानकारी न देने पर विभाग सौ प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकता है। वहीं रिटर्न फाइल करते समय टैक्स सेविंग बॉन्ड, नेशनल सेविंग स्कीम, पीएफ, होम लोन पर चुकाने वाले ब्याज की भी जानकारी दें ताकि आप उसका फायदा उठा सकें।

ये है इनकम टैक्स स्लैब

2.5 लाख से 5 लाख तक 10 प्रतिशत
5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत
10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत
नोटः अगर आपकी इनकम 2.70 लाख रुपये सालाना है तो 2000 रुपये बनने वाला टैक्स सरकार की ओर से माफ है।

सीनियर सिटीजन के लिए
3 लाख तक कोई टैक्स नहीं (उससे अधिक होने पर उपरोक्त नियम लागू)

सुपर सीनियर सिटीजन के लिए
31 अगस्त के बाद प्रति महीने 1 प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाना होगा आयकर

विदेशी खातों और संपत्ति की जानकारी दें

टैक्स पेयर्स को आईटीआर फाइल करते समय अपने सभी बैंक खातों की जानकारी देनी चाहिए। अगर किसी का विदेश में कोई खाता है तो उसकी जानकारी अवश्य तौर पर दें। इसके अलावा विदेशी संपत्ति की जानकारी के बारे में किसी भी तरह की गड़बड़ी आपको मुश्किल में डाल सकती है।

बालियान के अनुसार टैक्स डिपार्टमेंट की दलील है कि जिसके पास भी फॉरन एसेट्स हैं, निश्चित तौर पर उसकी इनकम भी काफी होगी और अगर उस शख्स ने इनकम छिपाई है, तो उसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। वहीं अब टैक्स डिपार्टमेंट विदेशी खातों और संपत्तियों पर भी कड़ी निगरानी रख रहा है।

नए आईटीआर-2 फॉर्म में आपको अपने फॉरन बैंक अकाउंट का होल्डिंग स्टेटस, खाता खोलने की तारीख, संबंधित साल से जुड़े ब्याज आदि की जानकारी देने की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा घरेलू बैंक अकाउंट्स की भी जानकारी देनी होगी।

टैक्स सेविंग बॉन्ड की जानकारी
टैक्स सेविंग इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स से टैक्स में राहत मिलती है, लेकिन इससे मिलने वाले ब्याज की जानकारी रिटर्न में देनी आवश्यक है। हालांकि, अगर आप बहुत कम ब्याज से होने वाली आय की जानकारी नहीं देते हैं या डिडक्शन गलत क्लेम करते हैं तो इसे बड़ा अपराध नहीं माना जाता है। इस तरह के मामलों में आपको एडिशनल टैक्स डिमांड भेजी जा सकती है। सेक्शन 271 (सी) के तहत रकम छिपाने पर पेनल्टी का भी प्रावधान है।

प्रॉपर्टी पर नजर
इस साल से टैक्स फॉर्म में प्रॉपर्टी के बारे में डिक्लेयरेशन के लिए अलग कॉलम दिया गया है। अगर आपके पास एक से ज्यादा प्रॉपर्टी है तो आपको रिटर्न में इसकी जानकारी देनी होगी। अगर यह प्रॉपर्टी रेंट पर दी गई है तो रेंटल इनकम की जानकारी अवश्य दें। उस पर आपको टैक्स भी चुकाना होगा। टैक्स कंसल्टेंट के अनुसार इस बात का ध्यान जरूर रखें कि अगर टैक्स पेयर्स ने आईटीआर में प्रॉपर्टी का जिक्र नहीं किया है तो ऐसा नहीं हो सकता कि वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बच पाएगा। इसलिए ऐसा करने से बचें।

पारिवारिक सदस्यों के नाम पर निवेश से होने वाली आय
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार टैक्स पेयर्स ने अगर पत्नी/पति या बच्चों के नाम पर कहीं निवेश किया है तो उससे होने वाली आय उसकी मानी जाएगी। उस हिसाब से उस पर टैक्स भी लगेगा।

गैर-वेतनभोगियों के लिए भी आईटीआर फॉर्म

कांट्रैक्ट और गैर-वेतनभोगियों के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने संशोधित आयकर रिटर्न फॉर्म जारी किया है। आईटीआर 3 से आईटीआर 7 तक वाले फॉर्म्स बिजनसमेन या प्रोफेशनल्स, सीमित उत्तरदायित्व भागीदारी, पार्टनरशिप वाली कंपनियां, हिंदू संयुक्त परिवारों और कंपनियों आदि जैसे करदाताओं के लिए हैं। कंपनियों को आईटीआर-6 के तहत भरे जाने वाले टैक्स रिर्टन में इस साल से पहले की तुलना में कहीं ज्यादा जानकारियां देनी होंगी। यह फॉर्म टैक्स प्राधिकरणों को विदेशी संपत्तियों और आय पर बेहतर नजर रखने में कारगर होगा। इससे आयकर विभाग को मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मदद मिलेगी।

सीएसआर का खर्च भी बताना होगा
आयकर विभाग ने पहली बार वित्तीय वर्ष के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत खर्चों की जानकारी देने वाला फॉर्म पेश किया है। ऐसे खर्चे आई-टी एक्ट की धारा 37(1) के तहत व्यावसायिक खर्चे नहीं माने जाते और न ही टैक्स के मद्देनजर डिडक्शन माना जाएगा।

एफडी के ब्याज पर कोई राहत नहीं
बैंक एफडी से मिलने वाले ब्याज की रकम अगर 10 हजार रुपये से कम है तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। सेक्शन 80टीटीए के तहत ब्याज को टैक्स से जो छूट मिली हुई है, वह बचत खातों पर लागू होती है। इसका मतलब यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट और रेकरिंग डिपॉजिट से अगर कोई आमदनी हो रही है तो उस पर टैक्स लगेगा।

टैक्स डिडक्शन का उठाएं फायदा

होम लोन प्रोसेसिंग फीस: होम लोन लेते समय इसकी प्रोसेसिंग फीस पर होने वाले खर्च को सेक्शन 24 के तहत आईटीआर भरते समय डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

बचत खाते पर: सरकारी बैंकों के बचत खाते से 10 हजार रुपये तक के ब्याज पर सेक्शन 80 टीटीए के तहत टैक्स में छूट का प्रावधान है। डाक घर के बचत खाते से 3,500 रुपये तक के ब्याज पर भी सेक्शन 10(15)(आई) के तहत टैक्स नहीं लगता।

नुकसान को भी कर सकते हैं एडजस्ट: स्टॉक मार्केट या किसी तरह के इन्वेस्टमेंट में फाइनेंशिल ईयर में अगर आपको किसी तरह का नुकसान हुआ हो तो उसे आप स्टॉक्स, प्रॉपर्टी, गोल्ड या डेट फंड की बिक्री से होने वाले फायदे से एडजस्ट कर सकते हैं।

गंभीर बीमारियों पर: टैक्सपेयर को सेक्शन 80डीडीबी में दर्ज कोई बीमारी है या इनमें से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति उस पर निर्भर हो तो 40 हजार रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। सीनियर सिटीजंस के मामले में यह डिडक्शन 60 हजार रुपये हो सकता है।

डिसेबिलिटी पर 50 हजार रुपये का डिडक्शन: कोई टैक्सपेयर 40 प्रतिशत डिसेबिलिटी का शिकार है तो सेक्शन 80यू के तहत वह 50,000 रुपये तक की डिडक्शन क्लेम कर सकता है।

चंदे की राशि पर भी क्लेम: टैक्स पेयर चाहे तो चंदे में दी गई रकम पर वह 50 से सौ फीसदी तक डिडक्शन क्लेम कर सकता है। हाउस रेंट पर भी मिलती है टैक्स में छूट: टैक्स पेयर्स मकान के लिए चुकाए गए किराए पर सेक्शन 80जीजी के तहत डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
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25 करोड़ से ज्यादा निवेश पर 15% छूट

किसी फर्म ने अगर वित्तीय वर्ष में नए प्लांट और मशीनरी पर 25 करोड़ या इससे अधिक का निवेश किया है तो लागत का 15 प्रतिशत डिडक्शन निवेश भत्ता के तौर पर माना जाएगा। इस भत्ते की दावेदारी के लिए पुख्ता कागजात देने जमा कराने होंगे।

विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं करने पर कार्रवाई
आयकर विभाग के अनुसार इन्फोर्समेंट एजेंसियां ऐसे लोगों के खिलाफ एंटी-मनी लाउंड्रिंग कानून के तहत एक्शन लेंगी, जो 30 सितंबर तक अपनी अवैध विदेशी संपत्तियों की घोषणा नहीं करते हैं। सरकार ने विदेश में संपत्तियों का खुलासा करने के लिए एक बार का मौका दिया है। इसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर है।
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