चंडीगढ़ में मुसलमान कर्मचारी रोजा रखकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
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इंसानियत तो एक है, मजहब अनेक हैं, ये जिंदगी इसको जीने के मकसद अनेक हैं। कोरोना महामारी के इस दौर में खुद को संक्रमण से बचाने के लिए लोग तमाम उपाय कर रहे हैं। इस सबके बीच खुदा के कुछ ऐसे नेक बंदे भी हैं, जो अस्पताल में कोरोना के मरीजों की देखभाल करते हुए रोजा रखकर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं।
चंडीगढ़ के जीएमसीएच- 32 के नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग के छात्र अस्पताल में ड्यूटी के दौरान इफ्तारी और सहरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों की देखभाल करते हुए रोजा रखने में उन्हें दोगुनी खुशी हो रही है। ड्यूटी के दौरान उनका समय कैसे गुजर जा रहा है उन्हें पता भी नहीं चल रहा। रोजा रखने वाले नर्सिंग ऑफिसर की मानें तो उन्हें इस गर्मी और काम के दबाव के बीच भूख और प्यास भी महसूस नहीं हो रही, क्योंकि वे जी जान से अपना फर्ज निभाने में जुटे हुए हैं। उनके इस नेक कार्य में अस्पताल प्रशासन भी उनकी पूरी मदद कर रहा है।
संक्रमित मरीजों की देखभाल के साथ रख रहा हूं रोजा
महामारी के इस दौर में हम सबको सबसे पहले अपना फर्ज निभाना होगा। इसीलिए मैंने रोजा रखते हुए कोविड-19 के मरीजों की देखभाल करने का निर्णय लिया है। मेरी ही तरह अन्य मुस्लिम भाई भी अपनी छुट्टियां रद्द करवा कर कोरोना के मरीजों की देखभाल के साथ रोजा रख रहे हैं। -मो असलम खान, नर्सिंग ऑफिसर
मानवता की सेवा करना पहला कर्तव्य
महामारी के इस दौर में पिछले 14 महीनों से लगातार कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। अल्लाह के बताए रास्ते पर चलते हुए मानवता की सेवा करना हमारा पहला कर्तव्य है। जहां तक रोजा रखने की बात है तो हम अस्पताल में ही ड्यूटी के दौरान साफ सफाई बरतते हुए नमाज पढ़कर इफ्तारी व सहरी भी कर रहे हैं जिससे हमारे कोई भी फर्ज अधूरे न रह जाए। -हनीफ खान, नर्सिंग ऑफिसर
जो दूसरे के दुख को न समझे, वह इंसान नहीं
कुरान में मानवता की सेवा और इंसानियत के बारे में जो सीख दी गई है, हम उसका ही पालन कर रहे हैं। जो इंसान दूसरे के दुख को ना समझे, वह इंसान नहीं है। इसलिए मैं ड्यूटी कर फर्ज निभाने के साथ रोजा भी रख रहा हूं। मजहब सिर्फ प्यार बांटना और दूसरों के दुखों को कम करना सिखाता है, जिसका पालन करते हुए रोजा रख रहा हूं। -आमिर हसन, नर्सिंग के छात्र
मरीजों की सेवा करते न भूख लगती है न प्यास
अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर अपनी ड्यूटी कैंसिल करवाकर मरीजों की देखभाल में जुटे हुए हैं। ऐसे में हम रोजा रखने के लिए छुट्टी कैसे ले सकते हैं। हम ड्यूटी के दौरान इफ्तारी और सहरी कर मरीजों की देखभाल के साथ ही रोजा भी कर रहे हैं। सच कहूं तो मरीजों की सेवा और देखभाल करते हुए न तो भूख लगती है न ही प्यास। पूरा दिन मानो देखते ही देखते कुछ घंटों में गुजर जाता है। -जाकिर हुसैन, नर्सिंग ऑफिसर
कोरोना महामारी के इस दौर में जीएमसीएच- 32 के नर्सिंग ऑफिसर अपनी और अपने परिवार की चिंता किए बिना मरीजों की देखभाल में जुटे हैं। कोविड के मरीजों की देखभाल के साथ ही रोजा रखकर नर्सिंग ऑफिसर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं। -डबकेस कुमार, अध्यक्ष, जीएमसीएच- 32 नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन