मशहूर शायर पद्मभूषण गुलजार (संपूर्ण सिंह कालरा) भारत-पाकिस्तान विभाजन में अपने परिवार के साथ खालसा कॉलेज के जिस रिफ्यूजी कैंप में रहे थे, उसी कैंप की दीवार से सटी श्री गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी में रविवार को उनके सम्मान के लिए शहर की बड़ी हस्तियां मौजूद थीं।
वे यूनिवर्सिटी में एक नाटक देखने पहुंचे थे। इस दौरान गुलजार की आंखों में आजादी की खुशी भी थी तो उजड़ने का दर्द भी। इससे पहले उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब के पास बनाए गए पार्टीशन म्यूजियम को भी देखा।
बंटवारे पर आधारित इस म्यूजियम को देख गुलजार की आंखें नम हुई और दर्द जुबां पर आ गया। गुलजार ने कहा बंटवारे का दर्द उस दिल से पूछो जो बंटा था। खैर, घरों में बंटवारा होते हैं।
बंटवारा केवल खेत-खलिहान, जमीन-जायदाद का होता है दिलों का नही। भारत-पाकिस्तान दोनों एक ही घर थे। अब भले ही एक नहीं हो सकते लेकिन दोनोंमिलकर एक-दूसरे के लिए सलामती तो मांग ही सकते हैं।