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लघु कहानियों से मुंशी प्रेमचंद को किया याद

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चंडीगढ़। प्रेमचंद का स्वप्न दुविधामुक्त समाज है। उनका एक स्वप्न यह भी रहा होगा कि उनका साहित्य केवल ऐतिहासिक रह जाए, उस समस्या-चित्रण में कोई प्रासंगिकता न मिले। प्रेमाश्रम में प्लेग की भयानक महामारी के दौर में जो कर्तव्य किसी लेखक का समाज को अवसाद से बाहर लाने का होता है वहां भी प्रेमचंद एक सफल लेखक के रूप में देखे जा सकते हैं।
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यह बात शनिवार को पीयू के हिंदी विभाग की ओर से ऑनलाइन प्रेमचंद जयंती उत्सव के समापन पर इग्नू नई दिल्ली के प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव ने कही। इस मौके पर ‘प्रेमचंद का स्वप्न समाज’ विषय पर उन्होंने अपनी बात कही। उन्होंने प्रेमचंद के निबंध-साहित्य को महत्व देते हुए कहा कि प्रेमचंद ऐसे पहले लेखक रहे जिन्होंने जाति-व्यवस्था को समूल नष्ट करने की बात अपने निबंधों के माध्यम से कही।
साहित्य समाज का दर्पण : प्रो. राजकुमार
मुख्य अतिथि वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के सबसे भविष्यदृष्टा लेखकों में से एक लेखक रहे हैं। प्रेमचंद ने साहित्य समाज का दर्पण की परिभाषा को अपनी चेतनता एवं चिंतनशीलता से सत्य साबित किया।
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मिलीं थीं 52 कहानियां
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लघु कहानी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में अंतिम तिथि तक 52 कहानियां प्राप्त हुईं। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. राजेश जायसवाल और प्रो. नीरज जैन भी शामिल रहीं। विभाग की वरिष्ठतम प्रो. नीरजा सूद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
अवधेश कनौजिया ने लिखी कहानी, काश समधी जी जिंदा होते, दो हजार का पुरस्कार मिला
वेब गोष्ठी में लघु कहानी प्रतियोगिता के विजेता की घोषणा विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. राज कुमार ने की। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों से 52 कहानियां प्राप्त हुईं। इनमें से निर्णायक मंडल की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अवधेश कनौजिया की कहानी ‘काश समधी जी जिंदा होते’ को 2000 रुपये का प्रथम पुरस्कार, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार के सन्नी सिंहरोहा की कहानी ‘दादा नहीं आया?’ को 1500 रुपये का द्वितीय पुरस्कार और पंजाब विश्वविद्यालय के संध्याकालीन विभाग के प्रियांशु की कहानी ‘विपत्ति की संपत्ति’ को 1000 रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया गया।
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