चंडीगढ़ नगर निगम की ओर से उपभोक्ता को गलत बिल भेजना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-1 चंडीगढ़ ने नगर निगम पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। आदेश की प्रति मिलने के एक महीने के अंदर हर्जाना राशि नहीं देने पर 15 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
शिकायतकर्ता सोमेश गुप्ता निवासी सेक्टर-38 वेस्ट ने सेक्टर 37 स्थित नगर निगम चंडीगढ़ के सब डिविजनल इंजीनियर जलापूर्ति के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उनके घर पर नगर निगम का पानी का कनेक्शन है। मई 2019 से वे औसत बिल रिसीव करते रहे। यह औसत बिल एक हजार रुपये था जबकि पहले पांच सौ रुपये आता था। नगर निगम के कर्मचारी नियमित रूप से पानी की रीडिंग लेते थे।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि इस संबंध में उन्होंने 25 फरवरी 2020 को नगर निगम को कानूनी नोटिस भेजा। इसमें औसत आधार पर भेजे गए सभी पिछले बिलों को सही करने के अलावा ली गई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित लौटाने का अनुरोध किया लेकिन नगर निगम ने कुछ नहीं किया।
नया मीटर लगाने के बाद भी औसत पर ही भेजते रहे बिल
शिकायतकर्ता ने कहा कि नगर निगम की ओर से 12 जून 2020 को पानी का एक और बिल 2136 रुपये का भेज दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 14 जुलाई 2020 को खुद जाकर नगर निगम के अधिकारियों से पानी का मीटर बदलने को कहा। शिकायतकर्ता ने नगर निगम कार्यालय से ही 180 रुपये में नया मीटर खरीदा, जिसे 17 जुलाई 2020 को घर पर लगा दिया गया। इसके बाद भी 10 अगस्त 2020 को उनका पानी का औसत बिल 1017 रुपये आया। फिर 16 सितंबर को 631 रुपये का बिल प्राप्त हुआ। शिकायतकर्ता ने पुराने पानी के बिल को ठीक करने के लिए 28 सितंबर को दूसरा कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। नगर निगम ने उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है।