-आप, भाजपा और शिअद की सियासी कान्फ्रेंसों में उठे मुद्दे और घोषणाएं
जगदीश जोशी
मुक्तसर। मेला माघी के अवसर पर बुधवार को राजनीतिक गतिविधियों ने पिछले कई वर्षों के शांत माहौल को तोड़ते हुए चुनावी गर्मी पैदा कर दी। आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत अन्य दलों ने 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी का शंखनाद किया। पिछले सालों में शहीदी जोड़ मेलों पर सियासी कार्यक्रम सीमित रह गए थे लेकिन इस बार सभी दलों ने अपनी-अपनी कान्फ्रेंसों के जरिए शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की।
भाजपा ने पहली बार मेला माघी पर सियासी कान्फ्रेंस की और अच्छी खासी भीड़ जुटाई। केंद्रीय नेताओं और प्रदेश नेतृत्व ने मंच से आप सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास हो रहा है। वहीं, आप और शिअद की कान्फ्रेंसों में भी एक-दूसरे पर राजनीतिक व्यंग देखे गए। कान्फ्रेंसों में गुरु साहिब की बेअदबी, गायब पावन स्वरूप, राजा वड़िंग का 12 का पहाड़ा जैसे मुद्दे जोर पकड़ते नजर आए।
सरकारी बसों से संगतों को लाने पर विवाद
आप सरकार की ओर से 1600 सरकारी बसों के माध्यम से संगतों को काॅन्फ्रेंस में लाने को लेकर भी सियासी बहस हुई। विपक्ष का आरोप है कि इन बसों का उपयोग चुनावी जनसंपर्क के लिए किया गया। भाजपा की काॅन्फ्रेंस में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मुक्तसर में बूड़ागुज्जर रोड पर रेलवे अंडरब्रिज बनाने और स्टेशन से लंबी दूरी की नई ट्रेनें चलाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुक्तसर के लोगों की सभी मांगों को पूरा किया जाएगा और आप सरकार राज्य को विनाश की ओर ले जा रही है। विशेष रूप से 2027 चुनावों की तैयारी को ध्यान में रखते हुए, सभी दलों ने जनसम्पर्क मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने पर जोर दिया। भाजपा की पहली कान्फ्रेंस और विपक्षी दलों की सक्रियता ने माघी मेला को सियासी मंच में तब्दील कर दिया।