बाहुबली मुख्तार अंसारी ने दो साल पहले पंजाब के मोहाली के सेक्टर-70 स्थित एक नामी बिल्डर से फोन पर 10 करोड़ की रंगदारी मांगी थी। यह फोन कॉल 27 सेकेंड की थी। कारोबारी ने इसे रिकॉर्ड कर लिया था। इसी कॉल रिकार्डिंग के आधार पर मटौर थाने में अंसारी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पंजाब पुलिस अंसारी को लेकर आई थी। करीब चार दिन मोहाली पुलिस की हिरासत में रहने के दौरान उसकी आवाज के नमूने लिए थे।
आला अधिकारियों के मुताबिक यह नमूने अंसारी की आवाज से मेल खाते हैं। मोहाली पुलिस ने इस केस में 10 मार्च को चालान पेश किया था। 31 मार्च को चालान की कॉपी मुख्तार अंसारी को सौंपी गई थी। मोहाली अदालत में आरोपी पर रंगदारी मांगने, सुबूत मिटाने और जान से मारने की धमकी देने के तहत आरोपपत्र दायर किया था। अगर सारी धाराओं में आरोपी दोषी पाया गया तो उसे सात साल तक सजा हो सकती है।
पंजाब ने यूपी का दावा किया खारिज, अंसारी की एंबुलेंस बुलेटप्रूफ नहीं
मुख्तार अंसारी की पेशी के दौरान इस्तेमाल एंबुलेंस के बुलेटप्रूफ होने का यूपी का दावा पंजाब सरकार ने खारिज कर दिया है। पंजाब के एडीजीपी जेल पीके सिन्हा ने साफ किया, अंसारी को लाने वाली एंबुलेंस सामान्य थी। यूपी के दावों में कोई दम नहीं है।
रोपड़ जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर मोहाली के बिल्डर से रंगदारी मांगने का आरोप है। उत्तर प्रदेश पुलिस अंसारी को ले जाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही है लेकिन वह अपनी खराब सेहत का हवाला देकर बचता आ रहा है। मोहाली में मुख्तार अंसारी की पेशी के दौरान उसे लाने वाली एंबुलेंस पर विवाद छिड़ा है।
यूपी के पूर्व डीजीपी ब्रजलाल के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी एंबुलेंस को बुलेटप्रूफ बताया। यूपी के पूर्व डीजीपी ब्रजलाल ने दावा किया था कि एंबुलेंस सैटेलाइट फोन से लैस है और इसमें अंसारी के गुर्गे उसकी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। पूर्व डीजीपी का कहना है कि अंसारी के यूपी की जेल में रहने के दौरान यह एंबुलेंस जेल के बाहर खड़ी रहती थी।
उत्तर प्रदेश के इन दावों पर पंजाब के एडीजीपी जेल पीके सिन्हा का कहना है कि एंबुलेंस बुलेटप्रूफ नहीं बल्कि साधारण थी, जिसे अंसारी द्वारा ही उपलब्ध करवाया गया था। अंसारी को यह अनुमति पंजाब बंदी नियम-1969 के तहत दी गई थी। सिन्हा ने कहा कि यूपी की अदालतों ने भी अंसारी को निजी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। अंसारी को यूपी भेजे जाने पर सिन्हा का कहना है कि इस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। उच्चतम न्यायालय के आदेश को किस तरह लागू किया जाना है, इस पर कानूनी सलाह ली जा रही है।