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इस कंपनी को चावल उत्पादन के लिए 3 बार मिल चुका अवार्ड

Sat, 16 Jan 2016 01:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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हरियाणा में करनाल जिले के घरौंडा की श्री जगदंबा एग्रोको एक्सपोर्ट लिमिटेड को एमएसएमई में तीसरी बार आउट स्टेंडिंग अवार्ड मिल चुका है। यह अपने कुल चावल उत्पादन का 80 फीसदी निर्यात करती है। सालाना कारोबार 400 करोड़ तक पहुंच गया है। 200 लोगों को इससे रोजगार मिल रहा है।
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इतिहास
सन् 1965 में गोहाना से मातु राम किदार नाथ के नाम से इसकी शुरुआत हुई। 1977 में घरौंडा में जय राइस मिल की स्थापना की गई। सन् 1981 में श्री जगदंबा एग्रीको एक्सपोर्ट लि. को लाला जयकिशन गोयल ने अराईपूरा से शुरू किया। इसके बाद से उन्होंने चावल का एक्सपोर्ट शुरू किया। यह एक आधुनिक प्लांट है।

उग्रवादियों ने की थी हत्या
सन् 1991 में जयकिशन गोयल व्यापार के सिलसिले में पंजाब गए हुए थे। वहां उग्रवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद परिवार परिवार में असमंजस की स्थिति बन गई। ऐसे कठिन समय में उनके बेटे सतीश गोयल और ज्ञान भूषण ने अपने दृढ़ संकल्प से श्रीजगदंबा एग्रीको को बुलिंदियों पर पहुंचा दिया।
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ये सम्मान मिले
अच्छी गुणवत्ता के लिए श्री जगदंबा एग्रीको के सीएमडी सतीश गोयल, निदेशक ज्ञान भूषण गोयल और विदेशी व्यापार निदेशक सामर्थ गोयल को अलग-अलग कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। सतीश गोयल को उद्योग रत्न अवार्ड से भी नवाजा गया, वहीं निदेशक ज्ञान भूषण गोयल व विदेशी व्यापार निदेशक सामर्थ गोयल को गुजरात में यंग टेलेंट अवार्ड से नवाजा जा चुका है। विदेशों में भी कई प्रदर्शनियों में एग्रीको एक्सपोर्ट को सम्मान दिया जा चुका है। कंपनी की ग्रोथ और बेस्ट क्वालिटी के चलते एग्रीको के निदेशकों को आउट स्टेंडिंग अवार्ड के लिए चुना गया है।

निर्यात पर ध्यान दे सरकार: गोयल
श्री जगदंबा एग्रीको के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश गोयल ने बताया कि हिंदुस्तान के बासमती चावल जैसी वैरायटी पूरे विश्व में नहीं है। अरब और यूरोपीय देश इसे पसंद करते हैं। एक साल से ईरान में बासमती चावल पर प्रतिबंध लगने के बाद उद्योग व किसान काफी प्रभावित हुए हैं। कुछ समय पहले ही ईरान ने प्रतिबंध में थोड़ी ढील दी है। इससे उद्योग मालिकों व किसानों को फायदा होना शुरू हो गया है। उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार से स्पेशल पैकेज की अपेक्षा रखते हैं। गोयल का कहना है कि पिछले कई साल से चावल उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है।

रहे तीन बार प्रधान
बिजनेस में अपने पिता को अपना गुरु मानने वाले सतीश गोयल को चावल की समझ बचपन से ही है। पिता के असमय चल बसने के कारण उन्हें बिजनेस संभालना पड़ा। इसलिए केवल 10वीं तक पढ़ाई कर सके। गोयल को एक नहीं तीन बार अनाज मंडी का प्रधान चुना गया। पहली बार तो उनकी 25 महज साल थी। बिजनेस के अलावा सामाजिक कार्यों में भी गोयल फैमिली की पूरी भागीदारी रहती है।
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