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सदन की बैठक में भड़कीं सांसद, बोलीं- स्मार्ट सिटी के नाम पर मुझे ताने मारते हैं लोग

Wed, 31 May 2017 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Kirron Kher
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सदन की मीटिंग में मंगलवार को सांसद किरण खेर का पारा हाई हो गया। पहले तो उन्होंने पार्षदों के समय पर न आने पर उन्हें झाड़ लगाई फिर बैठक में अधिकारियों को फटकार लगाई।
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खेर ने कमिश्नर से कहा कि दक्षिणी सेक्टरों में जो इस समय मैकेनिकल स्वीपिंग से सफाई करने वाली कंपनी है उसे या तो बदला जाए या उसमें सुधार किया जाए। वह पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एक शहरवासी की तरह बात कर रही हैं कि जिस तरह से शहर की सफाई होनी चाहिए, वैसी नहीं हो रही। रैंकिंग में दूसरे से 11वें नंबर पर पहुंचने पर लोग उन्हें ताने मारते हैं। कहते हैं कि स्मार्ट सिटी का यह हाल है। सांसद ने अधिकारियों को यह भी कहा कि शिकायत बताने के बाद ही क्यों दूर होती है। अधिकारी अपने स्तर पर क्यों नहीं समस्या को दूर करते हैं।

कंपनी ठीक तरह से काम नहीं कर रही
सांसद ने कहा कि बेशक अधिकारी सर्वेक्षण में पिछड़ने का कारण सिटीजन फीडबैक बता रहे हैं, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। सड़कों के किनारे से पत्ते कई दिन तक नहीं उठते। दक्षिणी सेक्टरों में सफाई की जिम्मेवारी जिस कंपनी को दी गई है, वह ठीक तरह से काम नहीं कर रही। 670 कर्मचारियों से काम चला रही है, जबकि पहले 1570 कर्मचारी थे।
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इससे बढ़िया कि अपनी मशीनें ले ली जाएं
खेर ने कहा कि जिन तीन स्वीपिंग मशीनों का किराया प्रतिमाह 15 लाख दिया जा रहा है, उस एक मशीन की कीमत एक करोड़ है। इससे अच्छा कि निगम खुद ही अपनी मशीन खरीद ले। यह काफी गंभीर विषय है। 

Kirron Kher
डेढ़ करोड़ कम में मिल रही थी अच्छी सर्विस
सांसद ने कहा कि पुराने सिस्टम में अच्छी सर्विस मिल रही थी। मालूम हो कि निगम ने पिछले साल दिसंबर में चुनाव से पहले लायंस कंपनी को दक्षिणी सेक्टरों में सफाई का टेंडर अलॉट किया है, जिसका निगम को हर माह पौने चार करोड़ रुपये का खर्चा पड़ रहा है जबकि पहले निगम की ओर से जिन कर्मचारियों से ठेके पर काम करवाया जाता था, उसका खर्चा अभी के मुकाबले में डेढ़ करोड़ रुपये कम था।

हैरान हूं, पूरे देश में समय पर सदन की मीटिंग होती है
सांसद सुबह 11 बजे समय पर सदन की बैठक में शामिल होने पहुंच गईं थीं, लेकिन जब समय पर मेयर, कमिश्नर और कई पार्षद बैठक में नहीं आए तो सांसद ने कहा कि यह बहुत गलत है। मैं बहुत हैरान हूं, पूरे देश में सदन की बैठक समय पर शुरू होती है। सांसद का गुस्सा ज्यादा बढ़ता देख भाजपा पार्षद सतीश कैंथ मेयर के कमरे में गए और उन्हें सांसद की नाराजगी की जानकारी दी जिसके बाद 11.15 बजे मेयर, कमिश्नर और अधिकारी सदन में आए।

वार्ड मॉनीटरिंग कमेटियों में नेताओं को शामिल ने करो
सांसद ने शहर की सफाई व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए कहा कि जो वार्ड मॉनीटरिंग कमेटियां हैं, उसमें रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय निवासियों को शामिल किया जाए। उसमें राजनीतिक दलों के नेताओं को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। विज्ञापन देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, जमीनी स्तर पर काम होना चाहिए। जबकि कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने वार्ड कमेटियों के अभी तक गठन न होने का मामला उठाया।

स्ट्रे डॉग्स मामले में कहा, कानून ऐसा कि हमारे हाथ बंध जाते हैं
खेर ने सदन में लावारिस कुत्तों की समस्या पर कहा कि हम सभी को मिलकर कुछ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून ऐसा है कि हमारे हाथ बंधे जाते हैं।
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Kirron Kher
99 प्रतिशत पेट डॉग रजिस्टर्ड नहीं : कमिश्नर
डॉग बाइट के केस पर कमिश्नर ने बताया कि प्रतिदिन 50 मामले आ रहे हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत पेट डॉग्स के काटने के हैं। 99 प्रतिशत पेट डॉग्स रजिस्टर्ड नहीं हैं। शहर में अवैध कुत्तों की खरीद फरोख्त की दुकानें चल रही हैं, जिन पर जल्द ही अभियान चलाए जाने की तैयारी है।

कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में सांसद भी होंगी शामिल
सदन की बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की हालत पतली होने और अधिकारों का भी मामला उठा जिस पर निर्णय लिया गया कि इन दोनों विभागों के लिए निगम और प्रशासन के बीच एक कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक होगी, जिसमें सांसद किरण खेर भी शामिल होंगी। सांसद ने कहा कि डिस्पेंसरियों की हालत अच्छी नहीं है, लोकल स्तर पर डॉक्टर नियुक्त होने चाहिए।

बायोमीट्रिक सिस्टम लागू नहीं: सांसद ने कहा, ऊपर से नीचे तक भाईचारा चल रहा
डिस्पेंसरियों में अभी तक बायोमीट्रिक हाजिरी सिस्टम लागू न होने पर सांसद ने एमओएच डॉ. भट्टी को कहा कि जो ऊपर से लेकर नीचे तक भाईचारा चल रहा है उसे बंद किया जाए। जबकि भट्टी ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों के कारण सिस्टम शुरू नहीं हो पाया है।

फेल हुए बच्चों के बारे में भी सोचना चाहिए
खेर ने कहा कि जो बच्चे फेल हुए हैं, उनके बारे में भी सोचना चाहिए। कई बार बच्चे पारिवारिक हालात के कारण पढ़ नहीं पाते। उन्होंने कहा कि इस समय ट्यूशन पढ़ाना एक बिजनेस बन गया है। ऐसे में फेल होने वाले बच्चों के लिए सरकारी स्तर पर कुछ होना चाहिए। डड्डूमाजरा की पार्षद फरमिला ने इस मुद्दे पर कहा कि उनके यहां पर नौवीं कक्षा में फेल होने पर ही निकाल दिया जाता है, उन्हें दाखिला नहीं मिलता है। फेल होने वाले बच्चों के लिए भी स्कूल खुुलने चाहिए। 
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