मौलीजागरां में बुनियादी सुविधाएं नहीं, एक लाख लोग बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर
पानी, सीवर और सड़कों की दुर्दशा, टैंकरों के सहारे प्यास बुझा रहे लोग, गंदा पानी आने से एक बच्ची की हो चुकी है मौत
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर की करीब 33 साल पुरानी मौलीजागरां कॉलोनी में बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। पानी, सीवर, सड़क और गलियों की बदहाली ने यहां रहने वाले करीब एक लाख लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। पिछले छह दिनों से इलाके में नियमित जलापूर्ति ठप पड़ी है और लोग टैंकरों के सहारे पीने का पानी जुटाने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी लेखपाल ने कहा कि टैंकर भी तय समय पर नहीं पहुंचते। कभी रात दस बजे तो कभी दोपहर में पानी आता है। कई घरों में तो शौचालय के इस्तेमाल तक के लिए पानी नहीं बचता। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। इलाके में रहने वाली सुमन ने बताया कि उनकी बेटी पीजीआई में भर्ती है लेकिन घर में अक्सर गंदा पानी आता है। इससे पेट की बीमारियां आम हो गई हैं।
मौलीजागरां क्षेत्र में करीब 32 हजार मतदाता हैं लेकिन शायद ही कोई सड़क ऐसी हो जो पूरी तरह दुरुस्त हो। कई जगह सीवर लाइनें चोक पड़ी हैं जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। रोड और गलियां टूट चुकी हैं और कुछ जगहों पर तो पूरी तरह बंद पड़ी हैं। बरसात के मौसम में हालात और बदतर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद कई इलाकों में कमर तक पानी भर जाता है, जो कई दिनों तक नहीं निकल पाता।
सात गलियों में पाइप लाइन बदलना जरूरी
मौलीजागरां की सात गलियों में पेयजल पाइप लाइन बदलने की सख्त जरूरत है। करीब सात किलोमीटर लंबी पाइप लाइन जर्जर हो चुकी है, जिससे गंदा पानी सप्लाई में मिल रहा है। इस काम पर अनुमानित 1.30 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सीवर और सड़कों के प्रस्ताव फाइलों में दबे
इलाके में करीब 4500 मीटर सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हो सका। वहीं, सड़कों और गलियों के निर्माण का प्रस्ताव जरूर तैयार है, जिसे मार्च से शुरू करने का दावा किया जा रहा है। पार्षद मनोज सोनकर का कहना है कि मौलीजागरां शहर के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों में शामिल है। समस्याओं को लेकर कई बार नगर निगम सदन में सवाल उठाए गए लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर यही समस्या किसी वीआईपी वार्ड की होती, तो कब की दूर हो चुकी होती। वहीं, नगर निगम के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि इलाके से जुड़े सभी प्रस्तावों पर जल्द काम शुरू कराया जाएगा। जिन कार्यों की फाइलें तैयार नहीं हैं, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाएगा। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल आश्वासन नहीं बल्कि जल्द जमीनी स्तर पर काम दिखाई दे।