बचपन में पोलियो की वजह से पांव ने काम करना बंद कर दिया। लेकिन अपनी मेहनत और जज्बे से वह पैरा बैडमिंटन में ऊंचे कीर्तिमान हासिल करने में कामयाब रहा। खिलाड़ी संजीव ने प्रतिद्वंदियों को मात देते हुए रोटरी नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप की व्हील चेयर कैटेगिरी में 2 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीते।
चैंपियनशिप 7 मई को बंगलूरू में खेली गई। इसमें सिंगल्स के फाइनल में संजीव ने उड़ीसा के एनएच खान को 21-6, 21-11 से हराकर गोल्ड जीता। वहीं डबल्स के फाइनल में संजीव ने महाराष्ट्र के सुरेश के साथ प्रेम कुमार (महाराष्ट्र) और एनएच खान (उड़ीसा) की जोड़ी को 21-15, 21-12 से शिकस्त दी।
मिक्स डबल्स में संजीव और आंध्र प्रदेश के कोमल की जोड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। संजीव का पांव पोलियो की वजह से बचपन में ही खराब हो गया था।
एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा न लेने का मलाल
अक्तूबर, 2013 में कोरिया में एशियन पैरा गेम्स हुई थी। इसके लिए बाकायदा संजीव ने ट्रायल भी दिए। लेकिन ऐन मौके पर व्हील चेयर की कैटेगिरी को हटा दिया गया। इस बात का अभी तक इस खिलाड़ी को मलाल है। संजीव के अनुसार उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी।
पीयू में ली ट्रेनिंग
संजीव ने 2008 से पंजाब यूनिवर्सिटी के पीयू जिम्नेजियम हॉल में सुरेंद्र महाजन से बैडमिंटन की ट्रेनिंग ली। यहीं पर की गई कड़ी ट्रेनिंग ही इस खिलाड़ी के काम आई।
उपलब्धियां
2009 - भारत में वर्ल्ड पैरा गेम्स में बैडमिंटन में सिल्वर मेडल।
2010- इसराईल में वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल।
2012- फ्रांस मेें वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिंगल्स में ब्रांज मेडल।
2013- जर्मनी में खेली गई वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल।