डॉ. जिंदर सिंह।
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कोरोना की शुरुआत होते ही पंजाब के मोहाली के युवा डॉक्टर जिंदर सिंह को इमरजेंसी ड्यूटी के लिए सिविल अस्पताल बुला लिया गया। उन्हें सैंपल एकत्र करने व मरीजों को होम क्वारंटीन की जिम्मेदारी सौंपी गई। डॉ. जिंदर बताते हैं कि शुरू में डर था, लेकिन हालात की नजाकत को समझते हुए डर पर काबू पाया और जुट गए।
छह महीने दिन रात काम किया, रोजाना 60 से 70 सैंपल लिए। काम काफी चुनौतीपूर्ण था। बहुत से संक्रमित सहयोग नहीं करते थे। उनके साथ पूरी सावधानी के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल काम होता था, लेकिन कभी धैर्य नहीं छोड़ा।
सभी मुश्किलों का सामना करते हुए रोजाना करीब 10 संक्रमितों को होम क्वारंटीन किया। मरीजों की देखभाल के साथ उनके परिवारों की शंकाओं को फोन पर दूर किया। इस सब के लिए दिन रात काम करना पड़ा। अगस्त तक खुद को परिवार से अलग रखा। मां हमेशा चिंता करती थीं। टीवी व अखबारों में सेहत कर्मियों के संक्रमित होने की खबरों से मां डर जाती थीं। उनकी मां अस्थमा की मरीज हैं, लिहाजा उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती थी। पिछले 10 महीनों में निजी जिंदगी तो जैसे खत्म ही हो गई। वे अब तक 40 हजार से ज्यादा लोगों के सैंपल ले चुके हैं और ड्यूटी अब भी जारी है।
न आउटिंग की और न जन्मदिन की पार्टी
डॉ. जिंदर कहते हैं कि इस साल न तो दोस्तों के साथ बाहर गए और न किसी की बर्थडे पार्टी की। नजदीकी रिश्तेदारों की शादियों में भी नहीं जा पाया। बहुत जरूरी होने पर ही बाजार में खरीदारी के लिए जाता हूं। वे अब तक 6 बार खुद कोरोना जांच करवा चुके हैं और अभी तक संक्रमण से बचे हैं।
उन्होंने बताया कि इस मुश्किल वक्त में आत्मविश्वास बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। इसके लिए टीम का सहयोग बड़ा सहारा बना। सरकार ने भी हर तरह के सुरक्षा उपकरण व साजो सामान में कमी नहीं आने दी। सेहत विभाग की तरफ से नियमित तौर पर करवाई गई कांफ्रेंस आत्मविश्वास बनाए रखने में कारगर साबित हुई।