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मातृ दिवस: बेटे से सीखा ऑनलाइन पढ़ाने का तरीका...संक्रमित होने के बाद भी बच्चों को पढ़ाया

Sun, 09 May 2021 09:38 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/मोहाली
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लेक्चरर अनु अपने बेटे के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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अनु रावल्ली बताती हैं कि मैं बाकरपुर के स्कूल में केमेस्ट्री की लेक्चरर हूं। मेरा बेटा आईआईटी रुड़की में पढ़ता है। कोरोना की वजह से संस्थान बंद है, उसकी पढ़ाई घर से ऑनलाइन चल रही है। वहीं हमारे स्कूल में भी पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। ऐसे में पहले अपने घर-परिवार की सभी जिम्मेदारियां निभाती हूं और इसके बाद खुद ऑनलाइन क्लास लेती हूं। 

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हमारे स्कूल में अधिकतर गांवों के जरूरतमंद घरों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे ऑनलाइन पढ़ाने का ज्यादा अनुभव नहीं था, इसलिए मैंने अपने बेटे से टिप्स लिए और अपने स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया। इसी दौरान तबीयत खराब होने पर 17 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गई। लेकिन इसके बावजूद अपनी ड्यूटी निभाई और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना नहीं छोड़ा। 

बेटे की मदद से बच्चों को पढ़ाने के लिए आसान तरीकों और स्टडी मैटीरियल का इस्तेमाल करती हूं, जिससे बच्चों को आसानी से समझ आ जाए। बच्चों का सिलेबस पूरा करवाया। इस बीच बेटे ने मेरा पूरा ध्यान रखा ताकि ऑनलाइन क्लास लगाने वाले बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े। 

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आइसोलेशन में रहते हुए मैंने पूरी क्लासें लगाई और साथ ही स्कूल के ऑफिस का काम भी संभाला। क्योंकि स्कूल प्रिंसिपल के सेवानिवृत्त होने के बाद से उनके काम की जिम्मेदारी भी मुझ पर ही है। वहीं अपने बेटे को समय देने के लिए उसको और खुद को कई घंटे मोबाइल फोन से दूर रखती हूं।

लॉकडाउन में पूरा समय घर और स्कूल के बच्चों की देखरेख में ही बीत रहा
चंडीगढ़ की शिक्षिका धीरजा ने बताया कि उनके एक बेटे की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही है तो दूसरे का वर्क फ्रोम होम है। साथ में स्कूल के विद्यार्थियों की क्लास लगानी पड़ती है। सबको एक साथ मैनेज करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन किसी तरह से काम चल रहा है। सुबह उठकर जल्दी परिवार का खाना तैयार करना। उसके बाद स्कूल जाना पड़ता है। कई विद्यार्थियों के पास संसाधन नहीं हैं तो शाम को आकर उनकी ऑनलाइन कक्षाएं लेनी पड़ती हैं। साथ ही उनके टेस्ट भी लेने पड़ते हैं। 

उन्होंने बताया कि संक्रमण की वजह से घर में काम करने वाले भी नहीं आ रहे हैं। इससे कामकाजी महिलाओं की जिम्मेदारियां और ज्यादा बढ़ गई हैं। वे कहती हैं कि हालातों की वजह से अब सब काम को मैनेज करने की आदत पड़ गई है। घर में बुजुर्ग मां भी है, इसलिए घर पर आने पर थोड़ा डर भी लगता है।

स्कूल में इन दिनों दाखिले और मिड-डे मील राशन वितरण के कारण अभिभावकों से संपर्क बना रहता है। काम के दौरान बार-बार सैनिटाइजर इस्तेमाल करने से हाथों का रंग बदल गया है। घर में भी स्कूल के बच्चों के साथ व्यस्तता को देख बेटे ने मोबाइल स्टैंड लाकर दिया है, जिससे कोई अन्य काम के दौरान भी अब आसानी से बच्चों के साथ बात हो जाती है।
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महामारी से खुद को बचाकर सबका ख्याल रखना मुश्किल टास्क है

नैंसी कपूर चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित किड्स आर किड्स स्कूल में स्कूल शिक्षिका हैं। इनकी बेटी समायरा इसी स्कूल में पहली में पढ़ती है। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन के आदेश के बाद शहर के स्कूल अभी बंद चल रहे हैं। इसके चलते मां और बेटी घर पर हैं लेकिन मां पर जिम्मेदारी दोगुनी है।

नैंसी ने बताया कि सुबह बेटी की ऑनलाइन क्लास होती है। इसके साथ उनकी भी ऑनलाइन क्लासेज चलती हैं। इस दौरान उनका ध्यान कभी बेटी पर तो कभी विद्यार्थियों पर रहता है। वहीं बाद में बेटी के साथ घर पर ही खेलना पड़ता है। कोरोना की वजह से बेटी के मन पर कोई नकारात्मक सोच न आए, इसके लिए उसे तरह-तरह की आइसक्रीम बनाकर खिलाती रहती हूं। भले ही स्कूल बंद हैं, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के साथ बच्चों व घर को संभालना बहुत मुश्किल काम है। इस डर में खुद को बचाकर सबका ध्यान रखना माताओं के लिए मुश्किल काम है।

घर से काम मतलब दोगुना काम
एकता सेक्टर-48 स्थित बैन्यन ट्री स्कूल में शिक्षिका हैं। इनकी बेटी पारूषी इसी स्कूल में 4वीं की छात्रा है। कोरोना के चलते दोनों के स्कूल बंद है और पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। भले ही स्कूल बंद हों, लेकिन काम का दबाव दोगुना बढ़ गया है। सबकुछ एक साथ मैनेज करना पड़ रहा है। अपने स्कूल के बच्चों के साथ बेटी की पढ़ाई पर ध्यान देना पड़ा रहा है। बेटी उदास न हो, इसके लिए उसे कहानियां सुनाती हूं। पेंटिंग्स करवाती हूं, ताकि उसका मन लगा रहे। बेटी को केक खाना बहुत पसंद है। इसके लिए यू-ट्यूब से रोज विभिन्न तरह के केक और अन्य रेसिपी बनानी सीख ली है।
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