चंडीगढ़। देश में एसिड अटैक का शिकार होने वाली पीड़िताओं में सबसे ज्यादा संख्या स्कूली छात्राओं की है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस उम्र में लड़के आकर्षण का शिकार होकर लड़कियों की इच्छा के विपरीत उनसे बातें मनवाने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में एक इन्कार उन्हें इस कदर आक्रामक बना देता है कि वह अपने ही उम्र की एक लड़की के चेहरे पर तेजाब फेंकने में भी संकोच नहीं करते। ये बातें लक्ष्मी फाउंडेशन की को-फाउंडर एडवोकेट डॉ. नवप्रीत कौर ने वीरवार को पीजीआई में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में एसिड अटैक जैसी घटनाओं को रोकना है तो लड़कों को बचपन से ही न सुनने और स्वीकार करने की आदत डालनी होगी ताकि वे इस तरह के निर्णय लेने की हिम्मत न कर सकें। डॉ. नवप्रीत कौर ने बताया कि साउथ एशिया के देशों में एसिड अटैक की पीड़िताओं की मानसिक स्थिति बेहद कमजोर होती है। क्योंकि यहां पितृसत्तात्मक समाज होने के कारण उन्हें अपनी बात कहने और आवाज उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, इसकी तुलना में अमेरिका और अन्य विकसित देशों में स्थिति ठीक उलट है। वहां उनका परिवार ऐसी घटनाओं से उबरने में हर संभव सहयोग कर रहा है। डॉ. नवप्रीत कौर का कहना है कि फाउंडेशन में पंजीकृत मामलों में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार की पीड़िताएं शामिल हैं।
घरेलू हिंसा में भी बढ़ रही एसिड अटैक की वारदात
डॉ. नवप्रीत कौर ने बताया कि 14 से 35 वर्ष के बीच की लड़की और महिलाओं पर एसिड अटैक सबसे ज्यादा हो रहा है। इसमें पहला वर्ग स्कूली छात्राओं व कॉलेज जाने वाली लड़कियों का है, जबकि दूसरा वर्ग शादीशुदा महिलाओं का है। इस दूसरे वर्ग में शामिल पीड़िताओं को सबसे ज्यादा उनके पति ही शिकार बना रहे हैं। ऐसी घटनाओं में ज्यादातर यह बात सामने आ रही है कि पति पत्नी पर शक होने के कारण उसके चेहरे पर गुस्सा उतारने के लिए एसिड का सहारा ले रहा है। वहीं, कई मामलों में यह भी पता चल रहा है कि अटैक करने वाले का उद्देश्य सिर्फ उसके चेहरे को वीभत्स बनाकर उसे उसके साथ पूरी उम्र जीने की सजा देना है।
लक्ष्मी की तरह आप न करें देरी
लक्ष्मी ने जो देरी की वह आप बिल्कुल न करें क्योंकि आपकी ओर से नजरअंदाज की हुई एक घटना आपके जीवन को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकती है। डॉ. नवप्रीत कौर का कहना है कि एक अटैक वाले मामले में लक्ष्मी ने एक साल तक उस लड़के की बातों को नजरअंदाज किया, जिसका खमियाजा उसे अंत में एसिड अटैक का शिकार होकर चुकाना पड़ा। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि स्कूल व कॉलेज जाने वाली लड़कियों को घर से बाहर निकलने के बाद जिस भी वजह से परेशानी हो रही हो, वह उसे अपने माता-पिता से जरूर साझा करें। इसके साथ ही इससे जुड़ी बातें अपने स्कूल प्रबंधन को भी बताएं ताकि समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकें।