भारी अंतर से जीत के बाद जमानत जब्त होने की कल्पना तो कोई भी नहीं कर सकता, लेकिन संगरूर के मतदाता ऐसा करिश्मा भी कर चुके हैं। दो दिग्गज नेताओं को संसद भवन में पहुंचाने के बाद फिर अगले चुनाव में उनकी जमानत जब्त करवाने में यहां के मतदाता जरा भी नहीं हिचके।
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संगरूर संसदीय सीट हमेशा से बड़े उलटफेर की साक्षी रही है। कोई भी सियासी दल यहां के मतदाताओं के मन को पढ़ने में सफल नहीं हो सका है।
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1984 में संगरूर लोकसभा सीट पर आधे से ज्यादा वोट लेकर करीब 22 फीसदी के मार्जिन से चुनाव जीतने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया 2009 के लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे। लोक भलाई पार्टी के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने 2009 में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें मात्र 12.35 फीसदी वोट ही नसीब हो सके थे। तब कांग्रेस के विजयइंदर सिंगला ने जीत दर्ज की थी।
1999 में संगरूर से लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को हरा कर संसद पहुंचाने वाले सिमरनजीत सिंह मान को भी ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ा था। 2009 में उन्हें मात्र 3.62 फीसदी और 2019 में 4.37 फीसदी वोट मिले थे और दोनों बार उनकी जमानत जब्त हो गई थी। सिमरनजीत सिंह मान ने 2022 में संगरूर संसदीय सीट से उपचुनाव में ताल ठोंकी थी और 5822 मतों के अंतर से जीत दर्ज करके आप के राष्ट्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री भगवंत मान को सकते में डाल दिया था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान इस सीट से 2014 और 2019 में भारी अंतर से चुनाव जीते थे। आप को यकीन था कि इस सीट पर उनके लिए कम से कम जीत तो निश्चित है, लेकिन मतदाताओं ने हैरत भरा फैसला कर आप का यह भ्रम तोड़ डाला था। एक बार फिर इस सीट पर कई दिग्गज नेता एक दूसरे को टक्कर दे रहे हैं और प्रचार को गति दे मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। मतदान अंतिम चरण एक जून को होने के चलते मतदाता फिलहाल खामोश हैं और मतदाताओं का झुकाव किस करवट बैठेगा यह आने वाला वक्त तय करेगा।