विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस के दो विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरा। सुरजीत धीमान ने सवाल किया था कि क्या सरकार अमरगढ़ और अहमदगढ़ के सीएचसी को अपग्रेड करने पर विचार करेगी। अगर ऐसा है तो इसका ब्योरा क्या है। सेहतमंत्री बलबीर सिद्धू ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल नहीं है।
इस पर धीमान बोले कि अगर कल लोग इस मुद्दे को लेकर सड़क पर आए तो धीमान को भी आना पड़ेगा। सिद्धू ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह संभावनाएं देखेंगे। वहीं, रजिंदर बेरी ने कहा कि मल्टीप्लेक्स में काफी लूट-खसोट हो रही है। सरकार इसे रोकने को कानून लाए।
वहां, खाने-पीने की चीजें मनमाने दाम पर बेची जाती हैं। महाराष्ट्र में हाईकोर्ट के आदेश पर मनमानी पर रोक लग चुकी है। पंजाब में भी की जाए। फूड सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत का जो भी फैसला आएगा, पंजाब में भी लागू कर देंगे।
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि धान की रोपाई अगले वर्ष किसी भी हालत में एक जून से नहीं शुरू की जाएगी। पानी बचाने और फसल चक्र में बदलाव को जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी। प्रश्नकाल के दौरान कुलतार संधवां ने पूछा कि सरकार ने इस बार रोपाई बीस से 13 जून कर दी है। क्या उसे अगले वर्ष भी एक जून किया जाएगा। क्योंकि लेट रोपाई से फसल में नमी ज्यादा होती है, पराली संभालने के लिए भी समय नहीं मिलता।
सीएम ने कहा कि इस साल प्रयोग के तौर पर रोपाई 13 जून से शुरू की गई थी। तब्दीली को स्थायी तौर पर निश्चित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पंजाब इस समय पानी की बड़ी कमी से जूझ रहा है। जल स्तर 17.1 एमएएफ होने का अनुमान लगाया था। लेकिन अब यह सिर्फ 13 एमएएफ रह गया है। ग्लेशियर पिघलने के कारण यह स्थिति बनी है।
इस साल प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 138 में 109 ब्लॉक अधिक जलशोषित की श्रेणी में हैं। 85 प्रतिशत इलाके में भूजल गिर रहा है, औसतन गिरावट पचास सेंटीमीटर है। सभी को पार्टी से ऊपर उठ कर इससे निपटने में मदद करनी चाहिए। संधवां के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब धान की ऐसी किस्में लगाई जा रही हैं जो 110 दिन में पक जाती हैं।
कैप्टन सरकार ने पंजाब सिविल सर्विसेज के लिए परीक्षा में बैठने के मौकों की संख्या बढ़ाने के लिए यूपीएससी का पैमाना अपनाने का फैसला किया है। यह जानकारी सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सदन में उठे एक सवाल पर दी है। लखवीर सिंह लक्खा ने सवाल किया कि क्या सरकार पीसीएस परीक्षा में यूपीएससी की तर्ज पर उम्मीदवारों को, खासतौर पर एससी और बीसी वर्ग से संबंधित लोगों के लिए मौके बढ़ाने पर विचार कर रही है। क्या मौकों की संख्या चार से बढ़ा कर छह करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
इस पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में यूपीएससी का पैमाना अपनाने का फैसला किया है। जिसके तहत सामान्य वर्ग के आवेदकों के लिए मौकों की संख्या चार से बढ़ा कर छह की जाएगी। पिछड़ी श्रेणियों के लोगों के लिए नौ मौके रहेंगे। जबकि, अनुसूचित जाति से संबंधित आवेदकों को अनगिनत मौके मिलेंगे।
केंद्रीय आयोग के नियमों के मुताबिक एससी कैटेगरी के लिए अधिकतम आयु 42 साल होगी। बीसी वर्ग के लिए 40 और जनरल कैटेगरी के लिए 38 साल होगी। सीएम ने कहा कि नियमों में तब्दीली लाने को सरकार पिछले कुछ हफ्तों से काम कर रही है। मौजूदा पंजाब सिविल सेवाएं नियमावली के मुताबिक पीसीएस (कार्यकारी शाखा) में सभी श्रेणियों के लिए चार मौके हैं। इसे लागू करने से पहले इस परीक्षा में बैठने के लिए सभी श्रेणियों के लिए मौकों की कोई सीमा नहीं होती थी।
पंजाब विधानसभा ने सोमवार को दी महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बिल 2019 और दि पंजाब एक्साइज (संशोधन) बिल 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में जिस समय यह बिल पेश किए गए, उस समय अकाली-भाजपा गठबंधन के सदस्य अनुपस्थित थे और आम आदमी पार्टी के सदस्य, बिलों की प्रति समय पर नहीं दिए जाने को लेकर वेल में प्रदर्शन कर रहे थे। सदन में बिल पेश करते समय भारी शोरगुल जारी रहा और बिलों पर बहस के लिए विपक्ष की ओर से कोई सदस्य मौजूद नहीं था। सरकार की ओर से राज्य में पीएमएल और आईएसएफएल (देशी और विदेशी) शराब के उत्पादन को विनियमित करने और उस पर नजर रखने के उद्देश्य से दि पंजाब एक्साइज (संशोधन) बिल 2019 लाया गया।
वर्तमान में पंजाब एक्साइज एक्ट 1914, धारा 31 (सी) के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी केवल डिस्टिलरीज और ब्रेवरीज पर लगाई जा सकती है। एक्साइज पॉलिसी 2019-20 में वेयर हाउसों पर भी एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव है। यह संशोधन विनिर्माण इकाइयों यानी डिस्टिलरीज, ब्रेवरीज और वेयर हाउसों में पीएमएल और आईएमएफएल के उत्पादन को विनियमित करने के उद्देश्य से किया गया है, जिसके लिए धारा 31 के क्लाज (सी) में संशोधन जरूरी था। विधानसभा ने राज्य में स्थापित की जा रही पहली खेल यूनिवर्सिटी को भी कानून जामा पहनाते हुए सोमवार को दी महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बिल 2019 को मंजूरी दे दी।
इस बिल के अनुसार, इस यूनिवर्सिटी का मुख्यालय पटियाला जिले में होगा और यह राज्य में ऐसे अन्य स्थानों पर कैंपस, कॉलेजों, क्षेत्रीय केंद्रों और अध्ययन केंद्रों की स्थापना या रखरखाव कर सकता है, जो उपयुक्त लगेंगे। इस बिल के तहत प्रो. गुरसेवक सिंह कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन पटियाला को यूनिवर्सिटी का संघटक कॉलेज बनाया गया है। इस कॉलेज की सभी चल-अचल संपत्तियां और इसके कर्मचारी यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर होंगे। इसके साथ ही यह भी प्रावधान कर दिया गया है कि राज्य के भीतर किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी शारीरिक शिक्षा या खेल महाविद्यालय या संस्थान अब इस अधिनियम के तहत स्थापित विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। यह यूनिवर्सिटी अपने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खेल फेडरेशनों, भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन और यूनिवर्सिटी खेल फेडरेशन के साथ तालमेल कर खेल प्रतियोगिताओं में उतारेगी।
प्रदेश सरकार की कर्ज माफी योजना से एक योग्य कर्जदान किसान इस वजह से महरूम रह गया क्योंकि पटवारी उसे ढूंढ नहीं पाया। आम आदमी पार्टी के विधायक अमन अरोड़ा इस कर्जदार किसान को विधानसभा सत्र के दौरान गैलरी में ले गए और जीरो ऑवर में यह मामला उठाकर सरकार की कर्ज माफी योजना को कटघरे में खड़ा कर दिया। सुनाम के गांव उभावाल के किसान भोला खान के पास सात कनाल ग्यारह मरले जमीन है और उसने करीब तीन वर्ष पहले गांव की सहकारी सभा से 32 हजार रुपये का कर्ज लिया था जो वर्तमान में करीब 37 हजार रुपये हो गया है।
किसान के कर्ज माफी आवेदन पर सहकारी सभा ने सभी शर्तें पूरी होने का हवाला दिया लेकिन संबंधित इलाके के पटवारी ने रिपोर्ट की कि वह कर्जदार किसान को नहीं ढूंढ पाए। लिहाजा उसका कर्ज माफी का आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया। इस मामले की जानकारी आप विधायक अमन अरोड़ा को मिली। विधायक अरोड़ा कर्जदार किसान भोला सिंह को सोमवार को विधानसभा सत्र में ले गए और जीरो ऑवर के दौरान गैलरी में बैठे पीड़ित किसान को हाउस के सामने पेश करते हुए सरकार की कर्जमाफी योजना पर सवाल उठाए।
विधायक अरोड़ा ने कहा कि सियासी कारणों के चलते इस कर्जदार किसान को कर्ज माफी योजना से वंचित रखा गया है। यह सरकार की नाकामी को दर्शाता है। भोला खान के इस मामले ने साबित कर दिया कि सरकार की जनकल्याण की योजनाएं सिर्फ दिखावा हैं और असली व योग्य परिवारों तक इन योजनाओं को लाभ नहीं पहुंच रहा है।