इस वॉकआउट के दौरान भाजपा विधायक भी चुटकी लेने से नहीं चूके। शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने सदन से बाहर जाते हुए विधायकों से कहा कि ‘अरे यह तो बता दो वॉकआउट किस मुद्दे पर कर रहे हो।’ पहले तो किसी कांग्रेस विधायक ने जवाब नहीं दिया।
मगर कुछ सेकेंड बाद विधायक रघुबीर कादियान सदन में वापस आए और उन्होंने रामबिलास शर्मा की बात का जवाब देते हुए कहा कि जो घोटाले सामने आए हैं, उनकी सीबीआई जांच की मांग को लेकर और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव नामंजूर करने को लेकर कांग्रेस का वॉकआउट हो रहा है। अपना जवाब देकर विधायक कादियान भी सदन से बाहर चले गए।
यह थे इनेलो-कांग्रेस के मुख्य ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
- इनेलो-कांग्रेस ने जो कुल 17 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए थे। उसमें एसवाईएल कनाल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार क्या कदम उठा रही है, किलोमीटर स्कीम घोटाले की जांच सीबीआई को दिए जाने, प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ने पर सरकार और पुलिस ने क्या कदम उठाया, रोहतक में पार्किंग का ठेका देने के दौरान अनियमितता, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश में कितने किसानों को मुआवजा दिया गया, एससी-एसटी छात्रों के पोस्ट मैट्रिक घोटाले की जांच सीबीआई को देने, ओवरलोडिड वाहनों से वसूली घोटाला, आयुष्मान भारत योजना के तहत हरियाणा के कितने लाभार्थियों को इसका लाभ मिला।
कर्मचारियों से किए गए 154 वादों पर सरकार का क्या स्टैंड रहा, आखिरी टेल तक पानी पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार प्रदेश में पेयजल व्यवस्था पर जानकारी दे संबंधित मुख्य ध्यानाकर्षण प्रस्ताव शामिल थे।
दादूपुर नलवी-एसवाईएल पर फिर सरकार को घेरा
-सदन में एक बार फिर दादूपुर नलवी और एसवाईएल नहर के मसले पर कांग्रेस व इनेलो ने सरकार पर निशाना साधा। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं प्रदेश की बड़ी परियोजनाएं हैं। लेकिन सरकार ने दादूपुर नलवी प्रोजेक्ट को बंद कर और एसवाईएल पर अभी तक कोई कार्रवाई न कर किसानों को धोखा दिया है।
उधर, कांग्रेसी विधायक रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अफसरों ने सरकार को दादूपुर नलवी नहर पर गलत रिपोर्ट दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में किसानों का मुआवजा बढ़ाने को कहा तो सरकार ने प्रोजेक्ट ही बंद कर दिया। जबकि सरकार को समझना चाहिए था कि ये प्रोजेक्ट केवल सिंचाई के लिए नहीं, बल्कि वाटर रिर्चाजिंग के लिए भी था, जो संबंधित इलाके के डार्क जोन एरिया के लिए एक संजीवनी साबित होगा।
दूसरा दादूपुर नलवी नहर को पिहोवा के रास्ते हांसी-बुटाना नहर से भी जोड़ा जा सकता था। इससे भी किसानों को बड़ा लाभ होता। सुरेजवाला ने कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि उनसे इस प्रोजेक्ट में किसानों संग धोखा कैसे हो गया।
कांग्रेस विधायकों पर सत्ता पक्ष ने दिखाई दरियादिली
मानसून सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के दो विधायकों और एक पूर्व विधायक को बड़ी सौगात दी है। सत्ता पक्ष ने दरियादिली दिखाते हुए अंतिम सत्र में तीनों विधायकों के खिलाफ चले आ रहे विशेषाधिकार हनन के मामलों को खत्म कर दिया। शून्यकाल के बाद विशेषाधिकार हनन के मामलों की समिति की सातवीं प्राथमिक रिपोर्ट चेयरमैन घनश्याम दास ने सदन पटल पर रखी।
यह रिपोर्ट कांग्रेस विधायक करण दलाल से जुड़ी हुई थी, जिसमें उन्होंने कमेटी की रिपोर्ट सौंपने की अवधि अगले विधानसभा सत्र तक बढ़ाने की मांग की। इस पर सीएम मनोहर लाल भी चकित रह गए। संसदीय कार्यमंत्री रामबिलास शर्मा ने मौका संभालते हुए सदन में विशेषाधिकार हनन मामले को समाप्त करने का प्रस्ताव रख दिया और सदन की सर्व सम्मति मांगी।
किसी के आपत्ति न जताने पर मामला खत्म करने को मंजूरी दे दी गई। स्पीकर कंवर पाल ने कहा कि उनके पास विशेषाधिकार हनन के कुल तीन मामले हैं, इसलिए तीनों पर खत्म करने पर गौर हो। जिसे सत्ता पक्ष ने सहमति दे दी। इससे कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा और पूर्व विधायक केहर सिंह रावत के खिलाफ चले आ रहे विशेषाधिकार हनन मामले भी खत्म हो गए।
इसलिए चल रहे थे मामले
. कांग्रेस विधायक करण दलाल ने 29 अगस्त 2016 को विधानसभा सत्र के दौरान कहा था कि फसल बीमा योजना का तीस प्रतिशत शेयर मंत्री की जेब में जाता है। सरकार के मांगने पर वह कोई सबूत पेश नहीं कर पाए। इसलिए उनके आरोपों को पूरी तरह झूठा मानते हुए विशेषाधिकार हनन का मामला चलाने को अनुमति दी गई थी
. कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा ने सात मार्च 2017 को विधानसभा सत्र के दौरान कहा था कि सरकार के संरक्षण में अवैध खनन चल रहा है। जो लोग खनन कर रहे हैं, वे सदन में बैठे हुए हैं। इस पर सरकार ने कुलदीप से उन लोगों के नाम पूछे थे, जिन्हें बताने में वह असमर्थ रहे। इसलिए सरकार ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन मामला चलाने को मंजूरी दी थी।
. इनेलो छोड़कर भाजपा में जा चुके पूर्व विधायक केहर सिंह रावत ने विधानसभा में भाजपा विधायक ज्ञान चंद गुप्ता पर पंचकूला में रेहड़ी वालों से वसूली करने का आरोप लगाया था, लेकिन वह उसे साबित नहीं कर पाए। इस पर सरकार ने उनके खिलाफ भी विशेषाधिकार हनन मामला चलाने को मंजूरी दी थी।
दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए रखा दो मिनट का मौन
हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत पहले दिन शोक प्रस्ताव पढ़ने के साथ हुई। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन सदन में रखा गया। सबसे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शोक प्रस्ताव पढ़े। स्पीकर कंवर पाल, कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी और इनेलो विधायक अभय चौटाला ने भी शोक संदेश पढ़े।
सभी ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, दिल्ली की भूतपूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, हरियाणा की भूतपूर्व मंत्री शारदा रानी व संयुक्त पंजाब विधानसभा की भूतपूर्व सदस्य स्नेह लता, चार स्वतंत्रता सेनानियों कुरुक्षेत्र के गांव कराह साहिब के जगीर सिंह, रेवाड़ी के गांव मुसेपुर के रामनारायण, अंबाला शहर के देसराज भट्ट और जिला चरखी दादरी के गांव द्वारका के दुलीचंद शामिल हैं।
मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारतीय सेनाओं के 34 शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी गई। कांवड़ियों के अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में हुए असामयिक निधन पर भी गहरा शोक प्रकट किया गया। विधायकों और पूर्व विधायकों के सगे संबंधियों की मृत्यु पर शोक संतप्त परिवारों के प्रति सदन में सभी ने संवेदना जताई।
सदन में कर्मचारियों के मुद्दों की गूंज
हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने सदन में कर्मचारियों और युवाओं के मुद्दों को जोरशोर से उठाया। शून्यकाल में शुरूआत कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला ने की। उन्होंने कहा कि एचएसएससी और एचपीएससी के बाहर नौकरी को लेकर युवा धरने पर बैठे हैं। कंप्यूटर शिक्षक, कच्चे कर्मचारी और हड़ताल के दौरान नौकरी पर रखे गए कर्मचारी आंदोलनरत हैं।
सरकार अनुबंध कर्मियों के लिए नियमितीकरण नीति बनाए और निकाले गए कर्मियों का समायोजन करे। सुरजेवाला ने इस ओर मुख्यमंत्री का ध्यान जरूर खींचा, लेकिन आश्वासन कोई नहीं मिला। कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने कहा कि तोशाम के लोहाणी गांव को उन्होंने गोद लिया था, सीएम उसकी राशि अधिकारियों को आदेश देकर जल्दी जारी कराएं। हरियाणा के ग्रामीण चौकीदारों के साथ वादाखिलाफी हुई है।
उन्होंने 10,200 मानदेय और मोबाइल देने की बात हुई थी लेकिन मानदेय सात हजार मिल रहा है। मोबाइल नहीं मिले। फार्मासिस्ट एसोसिएशन भी आंदोलनरत है। वह वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों पर भी गौर हो। पांच हजार से अधिक शिक्षा प्रेरकों को सरकार शिक्षा विभाग में समायोजित करे।
ग्रीन कॉरिडोर के मुआवजे को लेकर आंदोलन चल रहे हैं, भिवानी महेंद्रगढ़ के किसानों को भी एनसीआर के अन्य शहरों की तर्ज पर मुआवजा दें। किरण चौधरी की मांगों को भी सीएम मनोहर लाल ने नोट कर लिया। सीएम सत्र की समाप्ति पर अपने भाषण में इन मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं।