केरल में मानसून करीब एक हफ्ते की देरी से पहुंचा है। इसलिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मानसून देरी से ही आएगा। इन जगहों पर मानसून सबसे लेट पहुंचता है और सबसे जल्दी विदा भी हो जाता है। चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में मानसून पहुंचने की तारीख 28 जून है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार मानसून देरी से आएगा। लेकिन उससे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि देरी हुई तो मानसून कम बरसता है। ऐसा दावा मौसम विभाग का है।
मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने बताया कि यदि मानसून देरी से पहुंचा तो बारिश में गिरावट के 90 फीसदी चांस होते हैं। साल 2016 में मानसून दो जुलाई को आया। तब बारिश में 46 फीसदी की कमी देखी गई। साल 2014 में मानसून ने एक जुलाई को एंट्री मारी तो बारिश में 58 फीसदी की कमी देखी गई। इसके विपरीत बीते साल मानसून सही वक्त पर आया तो बारिश में 19 फीसदी उछाल देखी गई। इसका मतलब साफ है कि मानसून तय समय पर नहीं पहुंचा तो बारिश पर संकट छा सकता है।
18 जून तक मानसून सेंट्रल भारत के कई हिस्सों में पहुंच जाना चाहिए था। इनमें मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और यूपी के कई इलाके शामिल हैं, जबकि इस बार अभी तक मानसून महाराष्ट्र तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में इस बार चंडीगढ़ सहित हरियाणा व पंजाब में भी मानसून के कम से कम 10 से 12 दिन देरी से पहुंचने के आसार बन रहे हैं। साल 1987 में सबसे देरी से मानसून पहुंचा था। उस साल 27 जुलाई को मानसून पहुंचा और पूरे देश में जबरदस्त सूखा पड़ा था।