चंडीगढ़। इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) में 321 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
यह आरोप आईपीसी की धारा 120बी और 420 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) (डी) के तहत तय किए गए हैं। इसके साथ अदालत ने आरोपियों मुकेश वोहरा, राकेश कनवर, सतपाल गर्ग और एन चोकलिंगम की मामले से मुक्त करने की याचिका को भी खारिज कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
सीबीआई ने पिछले महीने चार्जशीट दायर कर आईओबी बैंक की चंडीगढ़ स्थित शाखा के तीन तत्कालीन असिस्टेंट बैंक मैनेजरों आशु मेहरा, नीतेश नेगी और गौरव भाटिया, ब्रिगेडियर (रिटा.) एमएस दुल्लत, प्रोपराइटर्स और चंडीगढ़ आधारित तीन निजी कंपनियों के दो डायरेक्टरों समेत 41 लोगों को आरोपी बनाया था।
यह है मामला
आठ अगस्त 2016 को दिल्ली सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप था कि चंडीगढ़ स्थित आईओबी शाखा के फॉरेक्स डिपार्टमेंट में 2010 से तैनात आशु मेहरा, नीतेश नेगी और गौरव भाटिया ने मिलकर चंडीगढ़ आधारित दो कंपनियों के डायरेक्टरों दिनेश कुमार, अमनप्रीत सिंह सोढी और मामले में आरोपी अमन किरपाल, गौरव किरपाल को फायदा पहुंचाते हुए पीएनबी, बीओबी और आईओबी को 47.86 मिलियन यूएस डॉलर (करीब 321 करोड़ रुपये) का नुकसान पहुंचाया है। आरोपी ब्रिगेडियर (रिटा.) एमएस दुल्लत मुख्य आरोपी आशु मेहरा के ससुर हैं और व्यापार एग्रोटेक लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, जिसमें दूसरा डायरेक्टर अमनप्रीत सिंह सोढी है। जांच में पाया गया कि तीनों मैनेजर ने अधिकारियों की अनुमति के बिना हांगकांग बेस कंपनी मैसर्स कलर वेब लिमिटेड कंपनी को पेमेंट के लिए पीएनबी की दुबई शाखा और बीओबी की बहामास शाखा को लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिया था। इसके अलावा झूठे बिल पर पेमेंट भी करवाई। इस आधार पर दोनों बैंकों ने विदेश में उन कंपनियों को करोड़ों की पेमेंट जारी कर दी थी। धोखाधड़ी होने के बाद मामले का खुलासा हुआ था।