बेटी से बीच सड़क छेड़छाड़ हुई तो आईएएस पिता को चोट पहुंची और उन्होंने फेसबुक पर दर्द उड़ेल दिया। दो बेटियों होने के नाते मुझे लगता है कि इस मामले का तर्कसंगत निष्कर्ष निकलना चाहिए। गुंडों को सजा मिलनी चाहिए। जैसा कि मुझे पता चला कि गुंडे प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कानून को अपना काम करना चाहिए, जैसे कि उनसे उम्मीद की जाती है। हम सभी जानते हैं कि उत्पीड़न के अधिकांश मामले रिपोर्ट नहीं किए जाते या फिर आरोपियों को छोड़ दिया जाता है। ऐसे मामलों में यदि आरोपी प्रभावशाली परिवारों से हो तो उनका सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
मुझे लगता है कि यदि ऐसे आरोपियों के खिलाफ हम जैसे लोग नहीं खड़े होंगे तो देश में दूसरे व्यक्ति भी ऐसा नहीं कर सकेंगे। यदि मैं इस मामले में अपनी बेटी के साथ नहीं हूं तो मैं अपने पिता होने का कर्त्तव्य पूरा करने में असफल माना जाऊंगा। मैं इस पूरे प्रकरण को दो कारणों से साझा कर रहा हूं। पहला, इस पूरे मामले में क्या हुआ, उसकी स्पष्ट जानकारी सभी को होनी चाहिए। दूसरा, यदि इस केस में जरूरत पड़ी तो आपसे समर्थन चाहूंगा। हमारा स्पष्ट इरादा है कि आरोपियों ने जो किया, उसकी उन्हें सजा मिले। हमारा मकसद उनके परिवार या रिश्तेदारों को नुकसान पहुंचाने का नहीं है।
हम अच्छी तरह से जानते हैं कि यह संघर्ष आसान नहीं है। हो सकता है कि आरोपी अपने प्रभाव की वजह से पीड़िता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसे बदनाम भी कर सकते हैं। कुछ दोस्त मुझे इस तरह के संघर्ष करने पर बेवकूफ ठहरा सकते हैं। हालांकि, मैं जानता हूं कि मेरी बेटी को जो दुख व ठेस पहुंची, उसे इतनी जल्दी भुलाया नहीं जा सकता। अगर हम दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश में नहीं रहेंगे तो देश की सभी बेटियों को दुख पहुंचेगा। हो सकता है कुछ बेटियां मेरी बेटी के तरह भाग्यशाली न हो। किसी को तो खड़ा होना होगा। जब तक हम लड़ सकते हैं, हमें लड़ना चाहिए।