मोगा बस कांड की वजह से चौतरफा किरकिरी के बाद शनिवार को पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने ऑर्बिट बसों को सड़कों से हटाने के निर्देश दे दिए। कंपनी ने तत्काल सभी बसों को सड़कों से हटा लिया है।
सुखबीर बादल और उनके पारिवारिक सदस्यों के मालिकाना हक वाली ऑर्बिट बसें मोगा कांड की वजह से लगातार विपक्ष के निशाने पर थीं। शनिवार को उप मुख्यमंत्री ने ऑर्बिट बसों को वापस लेने के निर्देश जारी करने के साथ ही कंपनी के सारे स्टाफ को ओरिएंटेशन कोर्स करवाने के लिए कहा। यह भी कहा कि जब तक कोर्स पूरा न हो, ऑर्बिट की कोई बस सड़कों पर न दौड़ें।
इसके तत्काल बाद कंपनी ने सभी बसों को वापस ले लिया और स्टाफ को कोर्स करवाने की घोषणा की। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कोर्स पूरा होने तक इसकी कोई बस नहीं चलेगी। बीते बुधवार शाम को मोगा से बाघापुराना जा रही ऑर्बिट की एक बस में छेड़छाड़ के बाद दलित महिला छिंदर कौर और उनकी बेटी अर्शदीप कौर को धक्का दे दिया गया था। घटना में अर्शदीप की मौत हो गई थी।
फैसले पर उठे सवाल
सुखबीर बादल ने ऑर्बिट बसों को सड़कों से उतारने का फैसला भले ही ले लिया हो, लेकिन इस पर तमाम तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कहा जा रहा है कि कहीं कंपनी के स्टाफ को पुलिस वेरिफिकेशन से बचाने के लिए तो ऐसा नहीं किया गया है। आशंका है कि अब ऑर्बिट की जगह किसी और नाम से बसें चलाई जाएंगी। हालांकि, सरकार की ओर से इन आशंकाओं को सिरे से नकारा जा रहा है।