देश के प्रधानमंत्री व हरियाणा के मुख्यमंत्री भी संघ से जुडे़ हैं, लेकिन मैं राजनीति से संबंध नहीं रखता। हमारे कार्यकर्ता अन्य राजनीतिक पार्टियों में भी होंगे। सभी से सिर्फ संघ के स्वयं सेवक होने के नाते बात होती है। संघ कोई अखिल भारतीय अखाड़ा नहीं है। जो भी यहां आता है, उसका स्वागत किया जाता है। बस शर्त यह है कि वह देशभावना से आए।
बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी में चल रहे आरएसएस के तरुणोदय शिविर के अंतिम दिन रविवार को सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने यह बात कही। भागवत ने कहा कि शाखा का कार्यक्रम मैदान में होता है, यहां कोई द्वार नहीं होता। शिविर में आओ भगवे, देश, मातृभूमि, पूर्वजों को नमन करो और जुट जाओ काम में। 90 सालों से हम काम कर रहे हैं, जिसमें करीब डेढ़ लाख अच्छे स्वयंसेवक कार्यरत हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत से सभी को आशाएं हैं। इसे जगाने की जरूरत है। संपूर्ण विश्व जानता है कि यहीं से कुछ होगा। हमारे में क्षमता है बस अपने पुरुषार्थ को जागृत करना होगा। भगवान भी उन्हीं की मदद करते हैं जो स्वयं उद्यम करते हैं।