चंडीगढ़। पंजाब के लिए पुराना कचरा (लिगेसी वेस्ट) मुसीबत बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसके निपटारे के लिए बड़े स्तर पर प्रयास शुरू किए हैं। लुधियाना, अमृतसर और जालंधर को फिलहाल पुराने कचरे से छुटकारा मिलने में समय लगेगा, क्योंकि तीनों नगर निगमों की तरफ से वर्ष 2027 तक इसका निपटारा किया जाएगा। वहीं, मोहाली नगर निगम ने वर्ष 2025 तक पुराने कचरे का निपटारा करने का लक्ष्य तय किया है।
पुराना कचरा पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। इसमें कंक्रीट, पॉलीथिन, रबड़, कांच, मिट्टी आदि सब मिक्स होता है। पंजाब के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च, 2024 तक सूबे के कुल 84.09 लाख टन पुराने कचरे में से 26.68 लाख टन का निस्तारण किया जा चुका है। पंजाब के कुल 166 शहरी स्थानीय निकायों में से 79 ने पुराने कचरे के निस्तारण का काम पूरा कर लिया है। बाकी बचे 57.41 लाख टन कचरे का निस्तारण 83 स्थानीय शहरी निकायों की तरफ से दिसंबर 2024 तक पूरा किया जाएगा।
इसी तरह अगर ठोस अपशिष्ट कचरे की बात की जाए तो राज्य के कुल शहरी निकायों में से 139 के पास कचरे के निपटारे की 100 प्रतिशत क्षमता है। 23 स्थानीय शहरी निकाय दिसंबर 2024 तक 100 प्रतिशत कचरे के निपटारे का लक्ष्य हासिल कर लेंगी। इसी तरह अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला कचरे के निपटारे के गैप को दिसंबर 2025 तक पूरा कर लेंगी। सरकार के अनुसार पुराने कचरे के साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उनके पास उचित फंड भी उपलब्ध है। इसके लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत 779.26 करोड़ रुपये का एक एक्शन प्लान भी मंजूर किया हुआ है। गीले कचरे के निस्तारण के लिए सरकार 17 बॉयो सीएनजी प्लांट लगाने की भी तैयारी कर रही है।