यूं लगेगा जैसे चली हो असली गोली
उन्होंने बताया कि जब यह गन चलेगी तो उसकी आवाज एक असली गन की तरह ही आएगी। इससे लोगों में एकदम दहशत मच जाएगी। लेकिन असली गन में प्रयोग होने वाले छर्रों की अपेक्षा इससे नुकसान कम होता है। क्योंकि छर्रे तेजी से निकलते हैं और शरीर को नुकसान भी पहुंचाते हैं। उन्होंने यह गन शॉक एंड अ प्रोसेस पर बनाई है।
छह महीने में तैयार की है गन
घोष ने बताया कि इस गन को तैयार करने में करीब छह महीने का समय लगा है। दो महीने गन को असेंबलिंग में लगे हैं। क्योंकि गन में कलर और रबड़ का एक साथ प्रयोग आसान नहीं था। यह करीब पचास मीटर तक एरिया कवर पाएगी। वहीं, इसका रंग बिखरेगा नहीं। उन्हें उम्मीद है कि यह प्रयोग पूरी तरह से कामयाब रहेगा। इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेज दी गई है। साथ ही गुजारिश की गई है कि इसे सुरक्षा एजेंसियों में शामिल करें।
प्लास्टिक का सही प्रयोग, लोगों को रोजगार
डॉ घोष ने बताया कि इसी बहाने जो प्लास्टिक की बोतलें बेकार हो जाती हैं। लोगों द्वारा गली नालियों में फेंक दी जाती हैं। उससे सीवरेज व ड्रेनेज की लाइन खराब होती है। इस तकनीक से उनका भी सही प्रयोग होगा। इसी बहाने लोगों को रोजगार मिलेगा। वह आसपास कबाड़ इकट्ठा करने वाले कई लोगों से ऐसी बोतलें खरीदते थे।
यह खोज भी है इनके नाम
इससे पहले डॉ. सम्राट घोष पॉल्यूशन फ्री पटाखे बनाकर सुर्खियों में आए थे। उनके इन पटाखों को केंद्र सरकार ने भी खूब सराहा था। इसके बाद उन्होंने फायर सेफ्टी उपकरण तैयार किया था। जिसे कोई भी आसानी से प्रयोग कर सकता है। इसके अलावा पानी को प्यूरीफाई करने फार्मूला भी तैयार कर चुके हैं।