केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पहले आम बजट में आईआईएम छोड़ पंजाब की झोली खाली रही। पंजाब की ज्यादातर मांगों पर जेटली चुप्पी साध गए। किसान व कारोबारी बजट से निराश हुए। उद्यमियों की मांगों पर भी कुछ नहीं हुआ, लेकिन उन्हें बजट में भविष्य की संभावनाएं जरूर नजर आ रही हैं।
पंजाब के लिए अच्छी खबर है कि केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र के साथ पंजाब में आईआईएम स्थापित करने का ऐलान किया गया। राष्ट्रीय विरासत शहर विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय) के तहत मथुरा, गया, कांचीपुरम, वेल्लनकणी और अजमेर के साथ अमृतसर को भी चुना गया है।
अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल मॉडल प्लानिंग से सात राज्यों में इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी बनेंगे। इसके अलावा आम बजट में पंजाब के लिए कुछ खास नहीं है।
पंजाब पर वित्त मंत्री ने मौन धारण कर लिया
मोदी सरकार के पहले आम बजट में पंजाब के लिए कुछ खास नहीं है। न तो टेक्सटाइल क्लस्टर पंजाब को मिला, न ही एम्स। चार राज्यों में शुरू किए जा रहे अल्ट्रा सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट में भी पंजाब शुमार नहीं है।
न ही सूबे को एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर, एग्रीकल्चर व हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी मिली। न ही मौजूदा पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के लिए ग्रांट का ऐलान किया गया।
लखनऊ और अहमदाबाद को मेट्रो प्रोजेक्ट मिला, लुधियाना पीछे रह गया। पंजाब की इंडस्ट्री, कारोबार और किसानों की तमाम मांगों पर भी केंद्रीय वित्त मंत्री ने मौन धारण कर लिया। उन्होंने अपने भाषण में मोहाली के एग्रो बायोटेक क्लस्टर का जिक्र भी किया।
बजट पर दिग्गजों की प्रतिक्रिया
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसानों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पहले धान का एमएसपी कम बढ़ाया गया। अब बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है। कर्ज और एमएसपी के मुद्दों पर केंद्र सरकार बिल्कुल चुप हो गई है। टैक्स फ्री डीजल की मांग भी पूरी नहीं हुई।
आल इंडिया एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, नॉर्थ रीजन के चेयरमैन ओपी रल्हन के मुताबिक एक्सपोर्ट के लिए फ्रेट सब्सिडी की मांग थी, जो पूरी नहीं हुई। एक्सपोर्ट सेक्टर पर खास फोकस नहीं नजर आया, लेकिन नए सी-पोर्ट से इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। गैस पाइपलाइन के लिए 15 हजार करोड़ और ई-मार्केटिंग भी अच्छी शुरुआत है।
रालसन इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ओंकार पाहवा ने कहा कि साइकिल इंडस्ट्री की कोई भी मांग पूरी नहीं हुई। एक्साइज ड्यूटी नहीं हटाई गई। जीएसटी पर अभी भी सरकार स्पष्ट नहीं है। पहले यूपीए के दो साल निकल गए, अब एनडीए के पहले बजट में भी जीएसटी पर स्थिति साफ नहीं है। कुल मिलाकर बजट ग्रोथ ओरिएंटेड है।
सीआईए पंजाब के कंवीनर राहुल आहुजा ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर ने कम ब्याज पर लोन की मांग की थी, कोई ध्यान नहीं दिया गया। एक करोड़ के टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर 15 फीसदी सब्सिडी मिलती है। इसकी सीमा पांच करोड़ करने की मांग थी, वह भी पूरी नहीं हुई। फ्रेट सब्सिडी भी नहीं दी गई।
टेक्सटाइल खुश, स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री निराश
टेक्सटाइल इंडस्ट्री आशंकित थी कि टेक्सटाइल पर एक्साइज ड्यूटी लग सकती है, लेकिन उन्हें राहत मिली। निटवियर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर ने कहा कि यार्न बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फिलामेंट फाइबर पर एक्साइज ड्यूटी दो से छह फीसदी कर दी गई है। जिससे कपड़ा महंगा होगा। निर्यातकों को राहत देते हुए एक्सपोर्ट इंसेंटिव तीन से पांच फीसदी किया गया है।
स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री को भी बजट से निराशा हाथ लगी है। खेल उद्योग संघ के प्रधान रविंदर धीर ने कहा कि सिर्फ एक आइटम ग्लव्स पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है। बाकी कोई राहत नहीं। आयात बढ़ता जा रहा है। डोमेस्टिक इंडस्ट्री को ऑक्सीजन देने के लिए सभी चीजों पर एक्साइज ड्यूटी खत्म की जानी चाहिए थी।
पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान अमृतलाल जैन ने कहा कि बजट में जीएसटी को लेकर कोई साफ रोडमैप नहीं है। इस बारे में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। मांग की गई थी कि किसानों की तरह छोटे कारोबारियों को भी कम ब्याज पर कर्ज दिया जाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बॉर्डर एरिया के लिए कोई पैकेज नहीं दिया गया।