चंडीगढ़। मोरनी के जंगल में आग के मामलों को लेकर पिछली सुनवाई पर सौंपे गए डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर के हलफनामे पर कहा कि प्रौद्योगिकी के युग में आधुनिक विकल्प जरूरी है। हाईकोर्ट ने सरकार को हवाई अग्निशमन सेवा को अपनाने पर विचार का आदेश दिया है। साथ ही याची को आदेश दिया है कि विभाग को जंगल की आग से निपटने के सुझाव सौंपे। पंचकूला निवासी वैभव वत्स और उदय प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मोरनी के जंगल में 21 मई को लगी आग का मुद्दा उठाया था। याचिका में आग को नियंत्रित करने के लिए तत्काल उचित और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश जारी करने की अपील की थी। याचिका में बताया गया था कि आग अभी भी सक्रिय है और यह आसपास के स्थानों तक फैल रही है। यदि इसे न रोका गया तो यह मनुष्यों, वन्य जीवन सहित पारिस्थितिकी संतुलन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। मामले में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर ने पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट को बताया था कि इस आग में स्थानीय निवासियों, पर्यटकों या अतिक्रमण करने वालों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पास वायु मार्ग से आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक उपकरण नहीं है लेकिन सीमित संसाधनों से ही आग पर काबू पा लिया गया है। कुछ मामलों में आसपास के खेतों में सफाई के लिए लगाई गई आग जंगल तक हवा से जा पहुंची थी। लापरवाही के ऐसे मामलों की सूचना पुलिस को दी जा चुकी है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि विभाग के पास एक दमकल गाड़ी है जो मोरनी में तैनात है। इसके अलावा, 18 मई को पहली आग की घटना के दिन जिला प्रशासन से दमकल गाड़ियों की मांग की गई थी, जिसे जिला अग्निशमन अधिकारी ने दो तीन घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिया था। अब उक्त दमकल गाड़ियों को मोरनी पहाड़ियों में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। हाईकोर्ट ने अब वायु मार्ग से आग बुझाने की तकनीक को अपनाने पर विचार करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया है।