मंगल ग्रह और अंतरिक्ष विज्ञान पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी परिकल्पना और कल्पना की उड़ान को मॉडल्स के जरिए प्रदर्शित किया।
इस मौके पर मार्स, मार्स रिकन्सेंस ऑरबिटर, मार्स क्लाइमेट ऑरबिटर, मार्स पोलर लैंडर, वाइकिंग ऑरबिटर एंड लैंडर्स जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ी जानकारियों केस साथ बेहतरीन मॉडल्स भी प्रस्तुत किए।
इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद चंडीगढ़ के सांसद पवन कुमार बंसल ने ‘डिजाइनिंग ए हेबिटेट ऑन मार्स’ के मुख्य थीम पर आधारित ‘स्टूडेंट स्पेस सेटलमेंट डिजाइन कंपीटिशन’ के तीन विजेता टीमों को 11 हजार रुपये, सात हजार और पांच हजार रुपये के पुरस्कार दिए।
प्रतियोगिता में सागर पब्लिक स्कूल भोपाल की टीम को पहला स्थान मिला, जबकि आनंद विद्या विहार, बडोदरा की टीम को दूसरा और मानव मंगल स्कूल, पंचकूला की टीम को तीसरा पुरस्कार मिला।
प्रदर्शनी का आयोजन ज्योतिर्विद्या प्रतिष्ठान, पुणे और दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल के सहयोग से किया गया। प्रदर्शनी में 1965 से लेकर, जब मंगल पर सबसे पहला यान भेजा गया था, हालिया मंगलयान, जिसे भारत की ओर से आंध्र प्रदेश स्थित श्री हरिकोटा से नवंबर में भेजा जाना है तक की जानकारियां शामिल थीं।
मंगल की तस्वीरों वाली पृष्ठभूमि और मंगल की जोखिमपूर्ण घाटियों के साथ क्योरियोसिटी वाला क्योरियोसिटी वर्किंग मॉडल सबके आकर्षण का केंद्र बना रहा। संबोधन में पवन कुमार बंसल ने कहा कि ऐसी शानदार पहल देखकर उनका मन खुश हो गया, क्योंकि अंतरिक्ष पर शोध की अहमियत देश के ज्यादातर लोग नहीं जानते। बेहतर होगा कि देश के युवाओं को अंतरिक्ष की बारीकियों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाए।
प्लेनेटोरियम की ख्वाहिश अधूरी: बंसल
चंडीगढ़ के सांसद पवन कुमार बंसल ने कहा कि मैं शहर में एक प्लेनेटोरियम बनाना चाहता था, लेकिन उसे पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट से मंजूरी नहीं मिल पाई। मुझे इस बात की बड़ी खुशी है कि इंटरनेशनल स्पेस सोसायटी और दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल के सहयोग से एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।