कांग्रेस ने आनंदपुर साहिब से निवर्तमान सांसद रवनीत बिट्टू को आखिर लुधियाना सीट से लड़ाने का फैसला कर लिया है। इसका औपचारिक ऐलान जल्द हो सकता है।
पार्टी ने बिट्टू को पहले आनंदपुर साहिब से टिकट दिया गया था। टिकट के ऐलान से भी काफी पहले बिट्टू ने चुनाव प्रचार शुरु कर दिया था। पर बाद में दिल्ली में कांग्रेस की सियासत ऐसी बदली कि एकाएक बिट्टू का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह अंबिका सोनी को टिकट दे दिया गया था।
टिकट काटते समय बिट्टू को कहा गया कि उन्हें लुधियाना से लड़ाया जाएगा। पहले तो बिट्टू नाराज हो गए, उन्होंने लुधियाना से लड़ने से इंकार कर दिया और सभी नेताओं से संपर्क तोड़ लिया था। जिसके बाद पार्टी वहां से हिंदू नेता को लड़ाने पर विचार करने लगी।
पहले सुरिंदर सिंगला, फिर विजय इंदर सिंगला, उसके बाद एयरटेल के राकेश भारती मित्तल के नाम पर विचार हुआ। इस बीच बिट्टू ने करीबियों से सलाह कर लुधियाना से लड़ने पर मन बनाया। पर तब तक बात उनके हाथ से निकल चुकी थी पर सोमवार रात मित्तल ने लड़ने से इंकार कर दिया। जिसके बाद बिट्टू की लॉटरी लग गई।
बिट्टू के दादा पूर्व सीएम स्व. बेअंत सिंह का लुधियाना गढ़ रहा है। इसी समीकरण को देखते हुए बिट्टू को टिकट दिया जा रहा है। वहीं, मनीष तिवारी की मुखालफत करने वाले भी बिट्टू के साथ खुल कर चलेंगे।
भट्ठल के लड़ने की उम्मीद कम
पार्टी हाईकमान इस बार सारे बड़े नेताओं को मैदान में उतार रही है। इस कड़ी में रजिंदर कौर भट्ठल को संगरूर से लड़ाने की बात चल रही थी। पर सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने भट्ठल के बजाय विजय इंदर सिंगला को ही संगरूर से लड़ाने का मन बना लिया है। उधर, जालंधर-होशियारपुर सीटें महिंदर सिंह केपी के चक्कर में फंसी हैं। केपी जालंधर से लड़ने पर अड़े हैं। दूसरी सीट से चौधरी संतोख या उनके बेटे बिक्रम चौधरी को टिकट मिलना तय है।