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लापता पावन स्वरूपों के मामले को लेकर हुई बैठक में लिए गए फैसले, सीनियर उपाध्यक्ष का इस्तीफा

Sat, 19 Sep 2020 11:51 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, अमृतसर

सार

  • एसजीपीसी के सीनियर उपाध्यक्ष रजिंदर सिंह मेहता का इस्तीफा, लौंगोवाल ने स्वीकारा
  • कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को एक वर्ष तक एसजीपीसी में कोई भी पद नहीं मिलेगा
  • सभी सदस्यों को एक सहज पाठ करने के आदेश, गुरुद्वारा साहिब में करनी होगी सेवा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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श्री अकाल तख्त साहिब में पंथक परंपराओं के अनुसार हुई पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 2016 के तत्कालीन एसजीपीसी पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों पर एक वर्ष तक एसजीपीसी प्रबंधन में कोई भी पद देने की पाबंदी लगा दी। वर्तमान सीनियर उपाध्यक्ष रजिंदर सिंह मेहता तत्कालीन कार्यकारिणी के सदय थे। जत्थेदार के इस आदेश के बाद रजिंदर सिंह मेहता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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इस्तीफे की एक कॉपी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को भेजकर उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के आगे वह नतमस्तक हैं। उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार लौंगोवाल ने मेहता का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 2016 की तत्कालीन कार्यकारिणी के सदस्यों को धार्मिक सजा सुनाई। इसके तहत कार्यकारिणी के सभी सदस्य एक वर्ष तक कोई भी पद नहीं संभाल सकेंगे।

लेकिन एसजीपीसी की जायदाद के संदर्भ में जो कमेटियां गठित है, उसमें सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा सभी सदस्य एक सहज पाठ करेंगे। जो सदस्य सहज पाठ करने में असमर्थ हैं, वह अपने घर में ग्रंथी सिंह से सहज पाठ आरंभ करवाकर सुनें। जितने दिन तक सहज पाठ होगा, उतने दिन कार्यकारिणी सदस्य अपनी शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार नजदीक के गुरुद्वारा साहिबान में सेवा करेंगे।
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एक माह तक किसी समागम में शामिल नहीं होंगे
2016 की कार्यकारिणी सदस्यों को अगले एक माह तक किसी भी धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक समागम में भाग न लेने के आदेश दिए गए। सभी सदस्य गुरुद्वारा रामसर साहिब व श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ करवाएंगे। जत्थेदार ने पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह के मामले में आरोपी एसजीपीसी सदस्य गुरपाल सिंह गोरा, रतन सिंह जफरवाल व प्रोफेसर सरचांद को भी धार्मिक सजा सुनाई।
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लौंगोवाल व कार्यकारिणी को सचखंड की एक परिक्रमा करने की धार्मिक सजा सुनाई

पांच सिंह साहिबान के बैठक में गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने अपना स्पष्टीकरण रखने का आग्रह किया। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने उनके इस आग्रह को स्वीकार कर लिया। लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने निजी स्वार्थ व लालच के कारण पावन स्वरूपों की भेंटें अपने पास रख ली थीं, जिसकी जांच श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा करवाई गई है। इस बात का बोझ एसजीपीसी की वर्तमान कार्यकारिणी पर है।

इस पर लौंगोवाल ने एसजीपीसी कार्यकारिणी की तरफ से कौम व श्री अकाल तख्त से क्षमा याचना की। वहीं कार्यकारिणी के सभी सदस्य क्षमा याचना के लिए अकाल तख्त पहुंचे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने आदेश में कहा कि अग्निकांड में पावन स्वरूपों की जो घटना हुई है, उसके पश्चाताप के लिए लौंगोवाल व कार्यकारिणी के सदस्य गुरुद्वारा रामसर साहिब व श्री अकाल तख्त साहिब में एक-एक अखंड पाठ साहिब करवाएं।

जब श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब रखा जाए, उस दौरान सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में सेवा करनी होगी। इस दौरान सभी सदस्य तीन दिन तक सारागढ़ी निवास स्थान से दर्शनी ड्योढ़ी तक झाड़ू मारने की धार्मिक सजा भी पूरी करेंगे। लौंगोवाल व कार्यकारिणी को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब की एक परिक्रमा करने की धार्मिक सजा भी सुनाई गई। इसके अलावा हाल ही में जिन एसजीपीसी टास्क फोर्स के सदस्यों ने सिख संगठनों के सदस्यों की दस्तार उतारी है, उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने के आदेश दिए गए।
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