चार साल पहले नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में चंडीगढ़ के स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी नाबालिग को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब बच्ची की तबीयत बिगड़ गई और उसे सेक्टर-16 के अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान पता चला कि बच्ची गर्भवती थी। इसके बाद खुलासा हुआ कि नाबालिग ने उसके साथ दुष्कर्म किया था।
वारदात 2019 की है। मामले में मलोया थाना पुलिस ने आरोपी नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत केस दर्ज किया था लेकिन उस पर लगे आरोप कोर्ट में साबित नहीं हो सके।
पुलिस को दी शिकायत में नाबालिग बच्ची ने बताया था कि घर में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे सेक्टर-16 के अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान पता चला कि बच्ची गर्भवती थी। बच्ची ने फिर बताया था कि अक्तूबर 2019 को एक आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे किसी को इस बारे में न बताने के लिए धमकाया। उसने इस बारे में किसी को नहीं बताया था। बच्ची के बयानों पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया।