केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह
केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा है कि जो लोग जातिवाद के फार्मूले पर 2019 का चुनाव जीतने की मंशा रखते हैं, उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। प्रदेश में जातिवाद का फार्मूला फेल है।
अमर उजाला कार्यालय में विशेष कार्यक्रम संवाद के दौरान बुधवार को केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने की अपनी इच्छा को बड़ी बेबाकी से रखा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में सत्तर फीसदी लोग गांवों में बसते हैं। गांव विशेष जाति बाहुल्य हो सकता है मगर जाति प्रभुत्व की स्थिति नहीं है। किसी गांव में 50 फीसदी राजपूत या जाट होंगे तो इतनी संख्या अन्य जातियों की भी है। सभी बिरादरियां परस्पर निर्भर हैं और उनमें भाईचारा है। अगर कोई जातिवाद की राजनीति करेगा तो उसे नुकसान होगा।
भावनात्मक मुद्दे कारगर
उन्होंने कहा कि जनता चुनाव का मूड छह माह पहले बनाती है मगर कोई यह सोचकर बैठा है कि छह माह पहले पब्लिक के मूड को अपनी तरफ कर लूंगा, ऐसे नेता गलतफहमी में हैं। भाजपा की वापसी के संबंध में उन्होंने कहा कि अगर पार्टी जनता को बदलाव महसूस कराने में सफल रही तो दोबारा सत्ता में लौट सकती है।
अगर किसी वर्ग विशेष या समुदाय ने यह महसूस किया कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है तो पार्टी की दोबारा सत्ता में लौटने की राह कठिन होगी। मानता हूं, प्रदेश सरकार के 90 प्रतिशत मंत्री व खुद मुख्यमंत्री नए हैं। उन्हें जमने और समझने में समय लगा। भावनात्मक मुद्दे हमेशा कारगर होते हैं। आखिरी समय पर कोई भी ऐसा मुद्दा लोगों का रुख तय कर सकता है।
विपक्ष का हाल
मंत्री ने विपक्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कंग्रेसी कन्फ्यूज हैं। प्रदेश में कांग्रेस के अंदर पांच-छह कांग्रेस हैं। दूसरी ओर इनेलो और बसपा का गठबंधन अप्राकृतिक है। लोकसभा चुनाव तक चाहे गठबंधन चल जाए, लेकिन मैं लिखकर देता हूं विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट जाएगा। इनेलो के मुख्य नेता जेल में हैं। लोगों के जहन में यह बात भी है कि सजा पूरी होने के बाद उनके चुनाव लड़ने पर वैधानिक दिक्कतें भी आएंगी।