चंडीगढ़। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से नए साल में स्कूलों में बच्चों के खाने में पोषण और गुणवत्ता में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है। इसके तहत शिक्षा विभाग 15 जनवरी से स्कूलों में मिड-डे मील में मिलेट शुरू करने जा रहा है। वहीं, मिड-डे मील में दूध को शुरू करने के लिए विभाग की ओर से टेंडर लगा दिया गया है।
शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे मील में पोषण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए डायटिशियन के साथ पिछले दिनों बैठक भी की गई थी। इसमें स्कूलों में मिड-डे मील रसोई का औचक निरीक्षण करने का फैसला लिया गया था जिससे खाने की गुणवत्ता की जांच की जा सके। चर्चा में फैसला लिया गया था कि किसी भी दिन औचक रूप से स्कूलों का दौरा कर मिड-डे मील रसोइयों में प्रतियोगिता करवाई जाएगी।
इसमें स्कूलों को पहला, दूसरा और तीसरा बेस्ट किचन का इनाम भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य खाने की गुणवत्ता और टेस्ट की जांच करना है। जिससे स्कूलों में बच्चों को बेहतर खाना उपलब्ध करवाया जा सके। शहर के लगभग 116 सरकारी स्कूलों में कलस्टर स्तर पर बनी मिड-डे मील रसोइयों में लगभग 70 हजार के करीब छात्रों के लिए खाना बनाया जाता है।
टैट्रापैक में बच्चों को दिया जाएगा दूध
स्कूलों में मिड-डे मील में बच्चों को दूध टैट्रापैक में दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़ ने बताया कि मिड-डे मील में 15 जनवरी से बदलाव किया जाएगा। 15 जनवरी से बच्चों के खाने में मिलेट का उपयोग शुरू कर दिया जाएगा। मिलेट को दलिए के रूप में दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी बच्चों को खाने के बाद दूध दिया जाएगा जिससे खाने में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा को बैलेंस किया जा सके। दूध के लिए टेंडर लगा दिया गया है। हालांकि कोरोना महामारी से पहले भी मिड-डे मील में दूध, केला या अंडे देने की योजना बनी थी। इसको लेकर वेबसाइट पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह अधर में ही रह गया था।