चंडीगढ़। लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण स्थानीय लोग दूध लेने के लिए गोशालाओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस कारण गोशालाओं में दूध की बिक्री नहीं हो पा रही है। दूध खराब न हो इसके लिए गोशाला संचालक मजबूरी में दूध को अनाथालयों और वृद्धाश्रम भेजने को मजबूर हैं। गोशाला संचालकों का कहना है कि कर्फ्यू के दौरान प्रशासन को दूध लेने वाले लोगों को थोड़ी छूट देनी चाहिए।
कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लगे लॉकडाउन और कर्फ्यू का साइड इफेक्ट चंडीगढ़ की गोशालाओं पर भी पड़ा है। गोशालाओं में चारे और अन्य खाद्य सामग्री की काफी दिक्कत हो रही है। इससे गोशालाओं के दूध उत्पादन में भी 25 फीसदी की गिरावट आई है। इसके साथ ही गोशालाओं के आसपास रहने वाले लोग कर्फ्यू से पहले दूध लेने के लिए आसानी से पहुंच जाते थे, लेकिन अब उन्हें दिक्कत आ रही है। इस कारण गोशालाओं का दूध वितरित नहीं हो पा रहा है। इससे आमदनी पर भी फर्क पड़ा है। दूध खराब न हो जाए इसलिए गोशाला संचालक मजबूरी में दूध को अनाथालयों और वृद्धाश्रम भेज रहे हैं। कुछ गोशाला संचालकों ने बताया कि उन्होंने अपनी इस परेशानी से यूटी के अधिकारियों को अवगत कराया है, उन्होंने जल्द ही समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।
प्रशासन खरीद सकता है गोशाला का दूध
गोशाला संचालकों को होने वाली इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए प्रशासन विचार कर रहा है। प्रशासन गोशाला के दूध से शहर में कोरोना संक्रमण के दौरान कार्यरत पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को चाय वितरण करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए प्रशासन गोशाला से दूध खरीद सकता है। प्रशासन इस पर जल्द ही निर्णय ले सकता है।