फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: हजारों किलोमीटर का सफर कर नंगल वेटलैंड पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

नंगल। सर्दियों के आगमन के साथ ही नंगल वेटलैंड की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। साइबेरिया, रूस और मध्य एशिया की सर्दियों से बचते हुए हजारों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां अपना बसेरा बनाते हैं। इस महीने इनकी वार्षिक गणना होने वाली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पक्षी बिना किसी नक्शे या जीपीएस सिस्टम के नंगल कैसे पहुंचते हैं और क्यों उनकी संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है?
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. संजीव गौतम के अनुसार, यह यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं। उनके दिमाग और चोंच में विशेष कोशिकाएं होती हैं जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को पहचानती हैं। यही उन्हें सही दिशा दिखाती हैं। डॉ. गौतम बताते हैं कि दिन में ये पक्षी सूरज की स्थिति और रात में तारों के समूह के आधार पर अपना रास्ता तय करते हैं। कई प्रजातियों में यह क्षमता जन्मजात होती है और वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन्हीं रास्तों का पालन करते हैं जो उनके पूर्वजों ने तय किए थे। साथ ही, वे अपने सफर में पहाड़, नदियाँ और झीलें लैंडमार्क के रूप में याद रखते हैं। सतलुज नदी का किनारा उन्हें सीधे नंगल वेटलैंड तक ले आता है।
विज्ञापन

नंगल वेटलैंड सिर्फ पंजाब का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थल है। यदि हम चाहते हैं कि ये मेहमान पक्षी भविष्य में भी हमारे आसमान की रौनक बढ़ाते रहें, तो इनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना बेहद जरूरी है। इस महीने होने वाली पक्षी गणना हमें संरक्षण और रणनीति बनाने में मदद करेगी।
विज्ञापन

घटती संख्या चिंता का विषय
जहां प्रकृति का यह अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, वहीं पक्षियों की घटती संख्या चिंता का कारण बन रही है। एडवोकेट परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि वैश्विक तापमान बढ़ने से प्रजनन चक्र और प्रवास के समय में बदलाव आया है। इसके अलावा वेटलैंड के आसपास बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप, शोर-शराबा, पानी का प्रदूषण और गिरते जलस्तर पक्षियों को प्रभावित कर रहे हैं। अवैध शिकार और अतिक्रमण भी उनकी संख्या घटाने में बड़ा कारण हैं।
नंगल वेटलैंड की अहमियत
-अंतरराष्ट्रीय धरोहर स्थल, पंजाब का प्रमुख वेटलैंड।
-सर्दियों में साइबेरिया, रूस और मध्य एशिया से प्रवासी पक्षी आते हैं।
-सतलुज नदी प्राकृतिक मार्ग के रूप में कार्य करती है।
-पक्षी गणना से भविष्य में संरक्षण रणनीति तय होगी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें