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Chandigarh News: पीजीआई में आधी रात आग<bha>;</bha> चीख-पुकार के बीच बचाई 424 मरीजों की जान, ओटी बंद, ऑपरेशन दो दिन टाले

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पीजीआई में आधी रात आग चीख-पुकार के बीच बचाई 424 मरीजों की जान, ओटी बंद, ऑपरेशन दो दिन टाले
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सबहेड
अस्पताल के पांचों तलों पर आग के साथ फैला धुआं, सुरक्षाकर्मियों ने शीशे तोड़कर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, सुबह चार बजे पाया काबू
प्वाइंटर
केवल इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए गए, जीएमसीएच-32 को अलर्ट पर रखा, मरीज रेफर किए
डीन अकादमिक प्रो. नरेश पांडा की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय जांच कमेटी गठित
दम घुटने से बेहाल मरीजों को ऑक्सीजन देकर बचाया
चश्मदीद बोले- बिजली कटने के कारण मोबाइल की रोशनी चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

महत्वपूर्ण तथ्य

चंडीगढ़। पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन में सोमवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे अचानक आग लगने से हाहाकार मच गया। भूमि तल पर सी-ब्लॉक स्थित कंप्यूटर कक्ष में पहले यूपीएस से चिंगारी उठी और देखते देखते नेहरू एक्सटेंशन के पांचों तल पर आग व धुंआ फैल गया। पांचों तल पर अलग-अलग वार्डों में कुल 424 मरीजों का इलाज चल रहा था। मरीजों के साथ वार्डों में तीमारदार भी थे।
धुआं फैलने से लोग वार्डों में फंस गए और दम घुटने से चीख-पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए बाहर भागने लगे। आनन-फानन सुरक्षाकर्मियों ने हर तल पर लगे शीशे तोड़े ताकि धुआं बाहर निकल सके। सुरक्षाकर्मियों, डॉक्टरों, नर्स, विद्यार्थियों और पुलिस व तीमारदारों की मदद से सभी मरीजों को बिल्डिंग से बाहर निकाल लिया गया, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। आग पर सुबह करीब चार बजे आग पर काबू पा लिया गया लेकिन सुबह तक धुंआ उठता रहा। प्राथमिक जांच में कंप्यूटर कक्ष में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात कही जा रही है। आग लगने के कारणों की जांच करने के लिए मंगलवार को डीन अकादमिक प्रोफेसर नरेश पांडा की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय कमेटी की गठन किया गया है।
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नेहरू एक्सटेंशन में आग लगने का असर मंगलवार को इलाज पर भी पड़ा। पीजीआई प्रशासन ने दो दिन के लिए ऑपरेशन थिएटर बंद कर सभी ऑपरेशन टाल दिए। सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन ही एक्सटेंशन ब्लॉक व अन्य जगहों पर आपात व्यवस्था कर किए गए। सोमवार देर रात और मंगलवार दिन में सामान्य मरीजों को जीएमसीएच-32 में भर्ती करवाया गया। साथ ही जीएमसीएच-32 को अलर्ट पर रखा गया है, इमरजेंसी पड़ने पर मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन की मदद ली जाएगी।
चश्मदीदों ने बताया कि वार्डों में इतना धुआं भर गया था कि मरीजों के साथ सामान्य लोगों का भी दम घुटने लगा था। बिजली भी कट गई थी, ऐसे में मोबाइल की रोशनी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और मरीजों को बाहर शिफ्ट किया गया। रात करीब 12 बजे हल्की बारिश होने पर मरीजों को एक्सटेंशन के अंदर भेज दिया गया, दम घुटने से बेहाल मरीजों को तत्काल कॉरिडोर में ही ऑक्सीजन दी गई। उधर, सूचना पर रात को ही पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल वरिष्ठ विभागीय सदस्यों, चिकित्सा अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीजीआई के इंजीनियरिंग, अग्निशमन विभाग की इकाई को हालात पर नियंत्रण करने के निर्देश दिए। धुआं और ताप गलियारों में पूरी तरह फैल गया था। इसके कारण आसपास के क्षेत्र में स्थित विभाग एडवांस यूरोलॉजी सेंटर, मेल सर्जिकल वार्ड के मरीजों को भी बाहर निकाला गया।
इसमें यूटी प्रशासन की अग्निशमन और पुलिस टीम ने भी सहयोग दिया। समय पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू होने से हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।

ऊपरी तल पर फंसे गंभीर मरीजों को क्रेन की मदद से निकाला
चश्मदीदों के मुताबिक, नेहरू एक्सटेंशन के भवन के पूरी तरह बंद होने के कारण आग देखते देखते तीसरे तल तक फैल गई। चौथे और पांचवें तल धुएं से भर गए। ऐसे में पहले, दूसरे और तीसरे तल पर मौजूद सारा सामान जलकर रखा हो गया। बचाव दल ने गंभीर मरीजों को क्रेन (हाई रेजिंग इलेक्ट्रिक ट्रॉली) की मदद से ऊपरी तलों से नीचे उतारा। इस दौरान वार्ड में मरीजों, तीमारदारों के साथ नर्स भी घबरा गईं थीं। पीजीआई प्रशासन के बुलाने पर छुट्टी से लौटे डॉक्टरों, नर्स, सुरक्षाकर्मियों, पुलिस की टीम ने सभी को हौसला दिया। सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर नीचे खुले स्थान पर सड़क और सामने पार्क में पहुंचाया गया।

मरीजों को रेस्क्यू कर रात दो बजे बहाल कर दीं सेवाएं
पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन में आग लगने के बाद मरीजों को बचाने के लिए 60 मिनट तक रेस्क्यू अभियान चला। अलग-अलग वार्ड के मरीजों को नेहरू एक्सटेंशन की दूसरी तरफ नवनिर्मित एक्सटेंशन भवन और एडवांस ट्रॉमा सेंटर में में शिफ्ट किया गया और आईसीयू सेवाएं शुरू की गईं। रात दो बजे तक गंभीर हालात वाले सभी मरीजों का इलाज बहाल कर लिया गया था। रात को छुट्टी पर गए डॉक्टरों और नर्स की टीम को भी मदद के लिए बुला लिया गया था।

सी-ब्लॉक में 24 घंटे चलता है काम
पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन के सी-ब्लॉक में मौजूद विभागों में 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित कामकाज चलता है। इस ब्लॉक में डायलिसिस यूनिट, एडल्ट किडनी यूनिट, रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट, फीमेल मेडिकल वार्ड, मेल मेडिकल वार्ड, गायनी, मैटरनिटी, नर्सरी और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और ऑपरेशन थिएटर मौजूद हैं। नेहरू एक्सटेंशन के पहली मंजिलल पर मेडिकल के सामान का स्टोररूम है, यहां मेडिकल दस्ताने, ऑपरेशन का सामान, एप्रेन, सर्जिकल आइटम इत्यादि रखे गए थे, जो जलकर राख हो गए। दूसरे और तीसरे तल पर बिजली के तारों और इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ है। वहीं, धुएं के गुबार के कारण पांचवें तल पर मौजूद कैंटीन और उसका सामान पूरी तरह काला हो गया है। चौथे और पांचवें तल की सभी दीवारें भी काली हो गईं हैं।

मरीजों को नहीं मिली रिपोर्ट, इलाज में आई बाधा
नेहरू एक्सटेंशन में आग के कारण नर्स और डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की रिपोर्ट्स को पोटली में बांधकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सभी रिपोर्ट मिक्स होने के कारण मंगलवार को नेहरू ब्लॉक में इलाज करवा रहे मरीजों को उनकी रिपोर्ट नहीं मिली, जिसके कारण वे परेशान होते रहे।

धर्मपाल पहुंचे पीजीआई, लिया नुकसान का जायजा
प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के सलाहकार धर्मपाल मंगलवार को पीजीआई पहुंचे और आग से हुए नुकसान का जायजा लिया। वहीं, निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इंजीनियरिंग टीम को तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य कर कामकाज बहाल करने के निर्देश दिए। पीजीआई की इंजीनियरिंग और बिजली विभाग की टीम पूरी रात और मंगलवार को पूरा दिन ड्यूटी पर रही। दोपहर साढ़े 12 बजे तक टूटी हुई खिड़कियों के सभी कांच पूरी तरह तोड़कर तलों की सफाई की गई। दोपहर करीब एक बजे पुरुष (मेल) सर्जिकल वार्ड में गंभीर मरीजों को वापस भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। दोपहर दो से चार बजे तक चौथे और पांचवें फ्लोर के तल और दीवारों की सफाई की गई। शाम चार बजे तक मैटरनिटी वार्ड और लेबर रूम में महिलाओं को शिफ्ट करना शुरू कर दिया गया था।
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कोट
सभी मरीजों को सुरक्षित निकाला, टीम ने खरोंच तक नहीं आने दी
कंप्यूटर रूम में यूपीएस सिस्टम की बैटरी में आग लगी और बहुत तेजी से फैल गई। मैं पीजीआई के सभी स्टाफ सदस्यों, यूटी प्रशासन की टीम का आभारी हूं, जिनकी तत्काल मदद से हम सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल सके और किसी को खरोंच तक नहीं आई। जांच कमेटी गठित कर दी गई है और रिस्टोरेशन प्रक्रिया पर भी रात से ही काम शुरू कर दिया गया है। वेटिलेंटर के मरीजों को वेंटिलेटर पर ही शिफ्ट ही किया गया था और अन्य का भी इलाज शुरू कर दिया गया है।
- प्रो विवेक लाल, निदेशक, पीजीआई
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