वर्ष 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) बीएल की टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे पांच विधायकों की सदस्यता पर वीरवार को हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई की याचिका पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस के कानन की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हरियाणा के मौजूदा विधानसभा चुनाव में यह फैसला विशेष महत्व रखेगा। कांग्रेस या हजकां में से किसी एक पर इस फैसले का प्रभाव निश्चित तौर पर पड़ेगा। हजकां प्रमुख समेत पार्टी के छह विधायक चुनाव जीते थे। इनमें असंध से जिले राम शर्मा, समालखा से धर्म सिंह छोक्कर, दादरी से सतपाल सांगवान, नारनौल से राव नरेंद्र सिंह और हांसी से विनोद भ्याणा हजकां के विधायक बने थे। इन पांचों विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था और जिले राम को छोड़कर बाकी चारों कांग्रेस की टिकट पर इस बार उन्हीं विधानसभा हलकों से भाग्य आजमा रहे हैं।
कंबोपुरा के सरपंच करम सिंह की मौत के मामले में जिले राम शर्मा के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। कांग्रेस से उन्हें टिकट नहीं मिला था, वह आजाद प्रत्याशी के तौर पर असंध से मैदान में हैं। बिश्नोई ने विधानसभा स्पीकर के समक्ष इन विधायकों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई कर सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी।