सिटी ब्यूटीफुल में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें रक्तदान का जुनून सवार है। जिद ऐसी कि रक्तदान करने में शहर के दो शख्स शतक ठोक चुके हैं। दिलचस्प यह है कि इनमें एक महिला शामिल हैं। इनका कहना है कि रक्तदान करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे है। इस मौके पर अमर उजाला इन महान रक्तदानियों के जज्बे को सलाम करता है। साथ ही जानते हैं इनके ब्लड डोनेशन के लंबे सफर के बारे में।
रक्तदान कर बनाया लिम्का बुक रिकार्ड
सिटी ब्यूटीफुल में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें रक्तदान का जुनून सवार है। पीजीआई के बायोकेमेस्ट्री लैब के टेक्नीकल असिस्टेंट अश्विनी मुंजाल उस जमाने से ब्लड डोनेट कर रहे हैं, जब रक्तदान करना शरीर के लिए कमजोरी माना जाता था। वे सभी भ्रांतियों को दूर करते हुए अब तक 124 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। उनका लक्ष्य हर साल चार बार ब्लड डोनेट करना है। जैसे ही तीन महीने का पीरियड खत्म होता है वे अगली बार की डोनेशन के लिए तैयारी शुरू कर देते हैं।
साल 2000 में लिम्का बुक आफ रिकार्ड ने उनके जज्बे को सलाम कर उन्हें सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनमें समाजसेवी की लगन थी। अब ऑपरेशन की इतनी अच्छी तकनीक आ गई है कि सर्जरी के दौरान खून काफी कम बहता है, लेकिन इसके विपरीत अब एक्सीडेंट बढ़ गए हैं तो थैलीसीमिया जैसी बीमारी भी है। इसलिए रक्त की हमेशा ही कमी रहती है।
उन्होंने कहा कि जब तक वे मेडिकल फिट रहेंगे तब तक रक्तदान करते रहेंगे। यदि लोग साल में एक भी बार रक्तदान कर दें तो खून की कमी से दम तोड़ने वाले मरीज बच जाएंगे। उनके परिवार में भी खुशियां लौट आएंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि 14 जून को पीजीआई के जाकिर हाल में लगने वाले रक्तदान में कैंप शहरवासी जरूर आएं।
104 बार रक्त दे चुकी हैं डा. वी उषा राव
पीजीआई की ट्रांसफ्यूजन अधिकारी डा. वी ऊषा राव महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। वे महिला होकर भी 104 बार ब्लड डोनेट कर चुकी हैं। अब तक किसी भी महिला ने इतनी बार ब्लड डोनेट नहीं किया है। यह अपने आप में एक रिकार्ड भी है और उन लोगों के लिए एक संदेश भी हैं, जो रक्तदान देने से कतराते हैं।
उन्होंने बताया जब वे इमरजेंसी में तैनात थी तो उस दौरान जो मरीज आते थे, उन्हें रक्त की बहुत जरूरत पड़ती थी। खून के लिए मरीजों व उनके परिजनों को कई बार तड़पते देखा। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान ही रक्तदान करना शुरू कर दिया था, लेकिन जब से इस प्रोफेशन में आईं तब से वे रेगुलर दान करने लगी। रक्तदान के प्रति कम जागरुकता पर वे कहती हैं कि जब वे 104 पर ब्लड डोनेट कर सकती हैं तो बाकी लोग क्यों नहीं?
जब उनसे पूछा गया कि आम तौर पर महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी होती है तो वे कैसे रक्तदान करें तो उनका जवाब था कि हरी सब्जियां खाएं, अपने आप ही एचबी की कमी पूरी हो जाएगी। सीजनल फल खाएं। सकारात्मक सोच रखे और सेल्फ मोटीवेट होकर रक्तदान करे।
उन्होंने बताया कि महिलाओं को सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए। बाकी 18 साल से ऊपर वे कभी भी डोनेट कर सकती हैं। दो महीने पहले ही डा. उषा ने ब्लड डोनेट किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी मैरिज एनिवर्सरी, अपने बर्थ डे व अपने बेटे व बेटियों के बर्थ डे पर रक्तदान कर एक सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा सकते हैं।