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Chandigarh News: मेयर को रोंदू राम कहा, सदन में हंगामा, भाजपा के दो पार्षद निलंबित

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चंडीगढ़। मेयर की ओर से शुक्रवार बुलाई गई सदन की विशेष बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक के शुरू होते ही भाजपा पार्षद कंवरजीत राणा ने बैठक बुलाने पर ही सवाल खड़े कर दिए। पूछा बिना किसी एजेंडे के बैठक क्यों बुलाई गई है। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने जवाब देते हुए कहा कि भाजपा अपने दिन क्यों भूल गई है। इस पर विवाद खड़ा हो गया। फिर कंवरजीत राणा ने मेयर को रोंदू राम कह दिया, जिससे मामला और बिगड़ गया। इसके बाद भाजपा पार्षद कंवरजीत राणा और मनोज सोनकर को निलंबित कर दिया गया। मार्शलों ने दोनों को सदन से खींचकर बाहर किया। शुक्रवार सुबह 11 बजे की बैठक करीब 11:30 बजे शुरू हुई। पांच घंटे तक बैठक चली लेकिन अंत तक कोई नतीजा नहीं निकला। 24 घंटे पानी की परियोजना, वेंडर समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी पर भी कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। भाजपा ने भी सवाल उठाया कि सिर्फ चर्चा के लिए सदन की बैठक क्यों बुलाई गई। इसके लिए ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जा सकती थी।
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मेयर को रोंदू राम कहने पर हुए हंगामे के दौरान आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सभी पार्षद वेल में आ गए और कहा कि यह मेयर का अपमान है। मेयर ने भी भाजपा पार्षद राणा को अपने शब्द वापस लेने को कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हंगामे के बीच मेयर ने राणा और पार्षद मनोज सोनकर को निलंबित कर दिया। इसके बाद मार्शल बुलाकर दोनों को सदन से बाहर कराया गया। एक घंटे तक यह हंगामा चला। उसके बाद चर्चा शुरू हुई।
पार्षद दमनप्रीत सिंह ने कहा कि सेक्टर-22 में अवैध वेंडरों की भरमार है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। कहा कि तीन दिन पहले निगम सचिव को पांच फोन किए लेकिन नहीं उठाया, न दोबारा कॉल आई। दूसरे अफसर को फोन किया तो बोले- सुबह आएंगे। आयुक्त के दखल के बाद कार्रवाई हुई। कहा कि जो दुकानदार जीएसटी और सभी तरह के टैक्स दे रहे हैं, वो बेहाल हैं। योगेश ढींगरा, गुरप्रीत सिंह गाबी ने भी कहा कि अवैध वेंडर बढ़ गए हैं। इस पर लगाम लगाने की जरूरत है।
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प्रॉपर्टी टैक्स एमनेस्टी स्कीम पर आयुक्त ने कहा कि इसे पहले नगर निगम की हाउस टैक्स कमेटी में लाया जाना चाहिए। आखिरी मुद्दा मेयर कुलदीप कुमार की तरफ से खुद के कार्यक्रमों के लिए एक मॉनिटरिंग सेल का गठन कर उसमें चार डीईओ, तीन क्लर्क, एक फोटोग्राफर की नियुक्ति का था। आयुक्त ने कहा कि निगम में पहले से ही एक मॉनिटरिंग सेल है। तीन क्लर्क नहीं दे सकते। हालांकि कर्मचारियों को एडजस्ट कर दिया जाएगा। पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि नगर निगम के 11000 कर्मचारियों के लिए आपात स्थिति के लिए एक फंड होना चाहिए। आयुक्त ने बताया कि बजट में इसका प्रावधान है और सभी कर्मचारियों का इंश्योरेंस भी कराया गया है।

भाजपा ने बैठक को बताया अवैध, प्रशासन ने मांगा जवाब
बैठक के लिए नगर निगम के सचिव की तरफ से वीरवार को नोटिस जारी किया गया था। इस पर भाजपा ने प्रशासन से शिकायत की। कहा कि सदन की बैठक को बुलाने के लिए पार्षदों को 72 घंटे पहले नोटिस देना जरूरी होता है लेकिन इस बैठक के लिए 24 घंटे का भी समय नहीं दिया गया। शुक्रवार को बैठक शुरू होने से कुछ मिनट पहले प्रशासन से नगर निगम को एक पत्र आ गया, जिसमें शिकायत की जांच कर जवाब मांगा गया। इसकी वजह से बैठक आधा घंटा देरी से शुरू हुई। पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने सदन के अंदर भी यह बात दोहराई। इस पर मेयर ने जवाब दिया और कहा कि 2017 से अब तक कई बार भाजपा के मेयर की तरफ से ऐसी मीटिंग बुलाई जा चुकी है। निगम के सचिव गुरिंदर सिंह सोढ़ी की तरफ से भी बताया गया कि किसी भी ऑर्डिनरी मीटिंग को बुलाने से पहले 72 घंटे का नोटिस देना जरूरी होता है। विशेष बैठक के लिए ऐसी कोई समय सीमा नहीं है।
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