मेयर का पद महिला के लिए रिजर्व होगा या नहीं। इस मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। इस संबंधी हाईकोर्ट में याचिका तीन पार्षदों ने डाली है। जिक्रयोग है कि नगर निगम के चुनाव संपन्न आने के बाद सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके मेयर सीट को महिला के लिए रिजर्व कर दिया था।
वहीं शहर में नगर निगम के पहले मेयर को लेकर कई दिनों से ठंडी पड़ी मोहाली की राजनीति हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर गर्मा गई है। मेयर चुनाव की सीक्रेट वोटिंग को लेकर पार्षद कुलजीत सिंह बेदी द्वारा दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने रद कर दिया है। इसके साथ ही साफ हो गया कि मेयर की वोटिंग अब पार्षदों द्वारा खड़े हाथ करके की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट की डबल बैंच द्वारा यह फैसला सुनाया गया है। हाईकोर्ट ने इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग को आधार बनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मेयर के लिए वोट डालना पार्षद का कोई संविधानिक हक नहीं है। सरकार के पास यह अधिकार है कि वह सीक्रेट बेल्ट या हाथ खड़े करके चुनाव करवा सकती है।
वहीं, मामले में पार्षद कुलजीत सिंह बेदी का कहना है कि वह हाईकोर्ट से फैसले की कॉपी प्राप्त होने के बाद अपने वकीलों से सलाह करेंगे। साथ ही जरूरत पड़ी तो मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसा कानून बनाकर लोकतंत्र के साथ बड़ा मजाक किया है।
उन्होंने कहा कि सीक्रेट बेल्ट एक व्यक्ति का प्रारंभिक संविधानक अधिकार है। इसके साथ ही वोट डालने की आजादी कायम रह सकती है। उन्होंने कहा कि सीक्रेट बेल्ट के माध्यम से वोटिंग करवाए जाने के मुद्दे को लेकर उनकी कोई निजी लड़ाई नहीं थी। बल्कि यह लोकतंत्र के हक की लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी स्टडी कर वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
किसी भी दल के पास बहुमत नहीं
शहर में किसी भी दल के पास मेयर बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। शिअद और भाजपा के पास जहां 23 सीटें हैं वहीं कांग्रेस के पास चौदह सीटें हैं। आजाद ग्रुप के पास केवल 11 सीटें हैं। जबकि मेयर बनाने के लिए 26 पार्षदों का समर्थन होना जरूरी है।