अनिल मसीह कांड के कारण फैसला
इस बदलाव के लिए नगर निगम चंडीगढ़ (कार्यविधि और कार्य संचालन) विनियम, 1996 के विनियमन 6 में संशोधन किया गया है, जिसे गुलाब चंद कटारिया ने मंगलवार को मंजूरी दी। वर्तमान में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से होते रहे हैं, जिसमें एक-एक कर पार्षद गुप्त वोट डालते हैं। अनिल मसीह कांड के बाद यह सवाल उठे थे कि जब 35 पार्षदों ने ही वोट डालना है और वह सभी पार्षद किसी पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में गुप्त मतदान क्यों कराया जाता है। इसकी जगह हाथ उठाकर चुनाव कराने की मांग की गई।
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पूर्व मेयर कुलदीप कुमार के कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2024 में नगर निगम हाउस में प्रस्ताव पारित हुआ। सांसद मनीष तिवारी ने भी साथ दिया। कुलदीप कुमार ने तो जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीक्रेट बैलेट हटाने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह फैसला प्रशासन को लेना होगा। इसके बाद प्रशासन ने विचार शुरू किया था। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया और अब प्रशासक ने इसे मंजूरी देकर लागू कर दिया है।
सामने आ जाएंगे पार्टी के खिलाफ जाने वाले पार्षद
हाथ उठाकर वोट कराने पर सबसे ज्यादा फायदा उस पार्टी को होगा, जिसके पास अधिक पार्षद हैं, क्योंकि कोई भी पार्षद यदि क्रॉस-वोटिंग करता है तो वह सार्वजनिक रूप से सामने आ जाएगा। इससे पार्टी के खिलाफ मतदान करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना आसान हो जाएगा। पिछले चुनाव में भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के कई पार्षदों ने भाजपा को वोट दिया, लेकिन गुप्त मतदान होने की वजह से आजतक किसी पार्षद पर कार्रवाई नहीं हो पाई।