बहाना कार्यक्रम का, लेकिन सरकारी खर्चा कर अपने अपने वार्ड में शक्ति प्रदर्शन दिखाकर मेयर पद के लिए दावेदार अपनी उम्मीदवारी पक्की करने का प्रयास कर रह हैं। जी हां मेयर के उम्मीदवार की घोषणा के लिए मात्र दो सप्ताह का समय रह गया है और इसलिए भाजपा के सीनियर नेताओं के गुटों में मेयर की कुर्सी पर कब्जाने के लिए खींचातान शुरू हो गई है।
भाजपा के इस समय नगर निगम में 26 में से 20 पार्षद हैं। इसलिए उनका मेयर बनने की उम्मीद सबसे ज्यादा है। दावेदार पार्टी उम्मीदवार बनने के लिए हर तरह का पैतरा अपना रहे हैं। जमकर एक दूसरे की शिकायतें भी की जा रही हैं। भाजपा में मेयर पद के लिए अरुण सूद और देवेश मोदगिल प्रबल दावेदार हैं।
इस माह में दो दिसंबर से शक्ति प्रदर्शन दिखाने का कार्यक्रम शुरू हो गया था। इस बहाने दावेदार अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह भी दिखाना चाहते हैं कि वह अपने वार्ड में सबसे ज्यादा विकास के काम करवा रहे हैं। सबसे पहले शुरुआत तीन दिसंबर को पूर्व मेयर अरुण सूद ने अपने वार्ड में शामिल सेक्टर-38 में डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने के प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते हुए इसे ऑफिशियल कार्यक्रम कहा जबकि उनके देवेश मोदगिल अक्तूबर माह में ही अपने वार्ड सेक्टर-48 में इस प्रोजेक्ट का तत्कालीन कमिश्नर बी पुरुषार्था से उद्घाटन करवा चुके थे।
इसके बाद 12 दिसंबर को अरुण सूद ने अपने वार्ड के महिला भवन में सरकारी खर्चे से यहां पर बने महिलाओं के जिम का उद्घाटन किया। जबकि बुधवार को मेयर पद के दावेदार देवेश मोदगिल ने सांसद किरण खेर से सेक्टर-48 सी के ग्रीन पार्क में ओपन एयर थियेटर के निर्माण का शिलान्यास रखवाया। जबकि अरुण सूद ने शनिवार को सेक्टर-38 सी में बने नए सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन करने का समारोह रखा है, इसमें प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को बुलाया गया है।
Mayor Election chandigarh
सबसे सीनियर पार्षद गुप्ता
भाजपा में सबसे सीनियर पार्षद राजेश गुप्ता हैं। वह इस समय सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर हैं, हालांकि उन्हें भी मेयर पद का दावेदार माना जा रहा है, लेकिन वह पार्टी के सीनियर नेताओं की गुटबाजी से दूर रहते हैं। राजेश गुप्ता नगर निगम का तीन बार चुनाव जीत चुके हैं जबकि सूद और मोदगिल पार्षद का पिछले साल दूसरा चुनाव जीते है। अगर सूद और मोदगिल में ज्यादा गुटबाजी उभरती है, जिससे पार्टी को लगता है कि इससे नुकसान होता है तो कोई तीसरा भी बाजी मार सकता है।
सूद टंडन और मोदगिल को सांसद का समर्थन
अरुण सूद साल 2016 में भी मेयर रह चुके हैं। इस साल के अंत में ही नगर निगम चुनाव हुए थे। सूद को भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और मोदगिल को सांसद किरण खेर का समर्थन है। मोदगिल को पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का भी समर्थन हैं और यह तीनों नेता सूद को उम्मीदवार बनने से रोककर टंडन को रोकना चाहते हैं।
टंडन गुट ने यह भी रणनीति बनाई है कि अगर हाईकमान सूद के नाम पर इसलिए तैयार नहीं होती है कि वह एक बार पहले मेयर रह चुका है तो पार्षद शक्ति देव शाली का नाम आगे कर दिया जाएगा। शक्तिदेव शाली इस समय जिला अध्यक्ष होने के साथ साथ संघ के करीबी है, लेकिन सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन इस बार देवेश मोदगिल को मेयर का उम्मीदवार बनवाने के लिए अड़े हुए हैं।
गुटबाजी का फायदा उठाना चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस के पास जीत दर्ज करने के लिए आंकड़ा नहीं है ऐसे में वह सिर्फ भाजपा में पैदा हो रही गुटबाजी पर नजर रखे हुए हैं। कांग्रेस अपना उम्मीदवार मैदान में उतारती है कि नहीं यह भाजपा की गुटबाजी पर ही निर्भर करता है। नगर निगम में कांग्रेस के मात्र 4 पार्षद है।
बिना मनोनीत के वोट के होगा पहला चुनाव
यह पहला मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का पहला चुनाव होगा, जिसमें नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षद अपना मतदान नहीं करेंगे। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह की अरजी पर मनोनीत के वोटिंग राइट के अधिकार को खारिज कर दिया है। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश को प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई की तारीख नए साल के 5 जनवरी को है। साल 1996 से जब से नगर निगम के मेयर का हर साल चुनाव हो रहा है। ऐसा पहली बार होगा जब मनोनीत वोट नहीं डाल पाएंगे। इस बात का मनोनीत को गम भी है।