किसी परंपरा को शुरू कर उसे निभाना आसान बात नहीं होती। जिस परंपरा को घर के मुखिया ने शुरू की थी, उसे अब घर के सदस्यों ने निभाना शुरू कर दिया है।
मोहाली की बावा फैमिली किसी परिचय के मोहताज नहीं है। सबसे पहले मुखिया एचएस बावा ने अपना शरीर दान किया। उसके बाद उनकी पत्नी बलवंत बावा ने भी इस परंपरा को निभाए रखा।
बलवंत बावा का निधन सोमवार को मोहाली में हुआ था। मंगलवार को उनका शरीर पीजीआई को दान में दे दिया गया। बलवंत बावा शहीद कर्नल आईबीएस बावा की मां है।
कर्नल बावा 1987 में श्रीलंका में युद्ध लड़ते वक्त शहीद हो गए थे। वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
कर्नल बावा की पत्नी और बलवंत बावा की बहू लिली बावा पंचकूला से पार्षद हैं। वे लगातार दूसरी बार पार्षद के लिए हाल में ही चुनी गईं हैं।
वे पार्षद के साथ समाजसेवी के रूप में जानी जाती हैं। पीजीआई के एनेटामी की हेड ऑफ डिपार्टमेंट डा. डेसी साहनी ने बताया कि जो राह बावा ने दिखाई है, उससे समाज के अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।
शरीर दान देने के लिए अभी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। पार्षद लिली बावा ने बताया कि घर के अन्य लोग भी परंपरा निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वक्त आने पर वे अपना शरीर दान कर देंगी। पीजीआई की प्रवक्ता मंजू वडवालकर ने बताया कि पीजीआई को बावा फैमिली पर गर्व है।