चंडीगढ़। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों की जर, जोरू और जमीन की मौलिक इच्छाओं को बलवंत गार्गी के नाटक बलदे टिब्बे के माध्यम से दिखाया गया। यह आयोजन पंजाब संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित शरद ऋतु थियेटर फेस्टिवल में किया गया। रंगकर्मी मंच अमृतसर ने इस नाटक को प्रस्तुत और डायरेक्ट मंचप्रीत ने किया।
अमेरिकी नाटक डिजायर अंडर द इल्म्स के पंजाबी रूपांतरण बलदे टिब्बे में कलाकारों ने सशक्त अभिनय दिखाया। कलाकारों ने ऐसा अभिनय किया कि कभी दर्शक भावुक होते दिखे तो कभी चिंतन में डूबे नजर आए। इस नाटक में एक महिला के व्यभिचारी जुनून का दिखाया गया। महिला ने धन के लोभ में एक बुजुर्ग से शादी कर ली और बाद में वह उसके बेटे से ही प्यार कर बैठी।
रत्न एक बूढ़ा आदमी जो दो बार शादी करता है, उसके तीन बेटे हैं। बुढ़ापे में अपनी पत्नियों के मरने पर अपनी वासना एवं अहंकार की प्यास शांत करने के लिए अपने बेटे की उम्र की गरीब युवती प्रीतो से वह शादी कर लेता है। वह रुपयों की कमी और समाज से बचने के लिए बुजुर्ग से ही शादी कर लेती है लेकिन वह अपने पति के बेटे सरवन की ओर आकर्षित हो जाती है। सरवन और प्रीतो एक दूसरे के काफी नजदीक आ जाते हैं। प्रीतो एक बच्चे को भी जन्म देती है। रत्न उसे अपना बच्चा समझता है इसलिए वह सारा धन उस बच्चे के नाम कर देता है। ऐसे में सरवन को गुस्सा आता है। प्रीतो उसे समझाती है कि यह बच्चा उसका है न कि रत्न का। इसके बावजूद सरवन उसकी बातों पर विश्वास नहीं करता है। इसलिए वह अपने प्यार को साबित करने के लिए उस बच्चे को मार देती है। नाटक प्रीतो और सरवन के एक-दूसरे के प्रति प्यार के साथ समाप्त हुआ।
ऐसे फेस्ट से मिलती है ऊर्जा : साहिब सिंह
पंजाब संगीत नाटक अकादमी के साहिब सिंह ने कहा कि शरद ऋतु थियेटर फेस्टिवल जैसे फेस्ट से काफी ऊर्जा मिलती है। पंजाब के थियेटर ग्रुप को इस प्रकार के थियेटर फेस्ट से न सिर्फ मंच मिला बल्कि वे चंडीगढ़ के कलाकारों से रूबरू भी हुए। इससे चंडीगढ़ के युवाओं को भी सीखने को मिला।