पंजाब में अवैध कॉलोनियों की तर्ज पर अब गैर पंजीकृत सोसाइटियों या जिन सोसाइटियों का कोऑपरेटिव रजिस्ट्रार के साथ पुराना कानूनी विवाद चल रहा है, उनमें नक्शे पास करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
गैर पंजीकृत सोसाइटियों में जिन मकानों के नक्शे पास भी हो गए, उनका रिकॉर्ड तलब किया गया है। ऐसी सोसाइटियों में आगे नक्शे पास करने पर रोक लगा दी गई है। पंजाब में हाउस बिल्डिंग सोसाइटियां तीन जोन में बांटी गईं हैं। पटियाला, फिरोजपुर और जालंधर डिवीजन में यह हाउसिंग सोसाइटियां हैं। कोऑपरेशन विभाग ने अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्टर्ड हाउसिंग सोसाइटियों की जानकारी साझा कर दी है, ताकि कोई भी खरीदार गैर पंजीकृत सोसाइटी में प्लॉट या शेयर खरीदकर फंसे नहीं।
सरकार की नजर अब अवैध या बिना पंजीकरण के चल रही सोसाइटियों पर है। अभी तक तहसील और सरकारी तंत्र का प्रयोग कर गैर पंजीकृत सोसाइटियों में बिना नक्शे या किसी तरह नक्शा पास करवाकर निर्माण किया जा रहा है, लेकिन सरकार के इस फैसले ने अब गैर पंजीकृत सोसाइटियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यहां तक कि जो सोसाइटी सरकार के मानकों को पूरा नहीं करतीं हैं, वे भी इसके दायरे में आएंगी।
सरकार के मानक पूरा न करने वाली सोसाइटियों का रिकॉर्ड तलब
कोऑपरेशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीएम भगवंत मान ने यह आदेश दिए हैं कि प्रदेश भर में जो भी हाउसिंग सोसाइटी सरकार के मानकों को पूरा नहीं कर रही, उसका रिकॉर्ड तैयार करें।
पंजाब में तीन जोन में हाउसिंग सोसाइटियों को बांटा गया है। पटियाला डिवीजन के अंतर्गत बरनाला, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, मोहाली, लुधियाना, संगरूर और रोपड़ शामिल हैं। इसी तरह फिरोजपुर डिवीजन में फाजिल्का, मानसा, फिरोजपुर, बठिंडा, मुक्तसर और मोगा जिले हैं। जालंधर डिवीजन में तरनतारन, कपूरथला, अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, एसबीएस नगर और पठानकोट का एरिया शामिल है।
15 हजार अवैध कॉलोनियों पर भी सरकार का शिकंजा
पंजाब सरकार प्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर भी लगातार शिकंजा कस रही है। सरकार ने प्लॉट की रजिस्ट्री कराते समय कॉलोनाइजर और प्लॉट मालिक को डेवलपर के लाइसेंस, जिस तारीख को लाइसेंस जारी किया उसके साक्ष्य, पैन नंबर और अन्य अहम दस्तावेज जमा कराना अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश में करीब 15 हजार अवैध कॉलोनियां हैं। पंजाब सरकार के अर्बन लोकल बॉडीज विभाग ने हर जिले को संबंधित आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनियों का रिकॉर्ड खंगाला जाए। सरकार की ओर से यह नई व्यवस्था इसलिए शुरू की गई है, ताकि क्रमबद्ध एवं सुचारु ढंग से संपत्तियों की रजिस्ट्री हो सके। जो कॉलोनियां लीगल हैं, उनमें भू मालिकों को आगे चलकर कोई समस्या न आए।